दीपिका गोयल (संस्थापक संस्था अग्रमंच) विवाहित स्त्रियां सालभर इस त्यौहार का इंतजार करती हैं तथा निर्जला व्रत कर अपने पति की लम्बी उम्र एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती है। करवा चौथ व्रत में महिलाओं को सरगी और करवा के महत्व को नंजरअंदाज नही करना चाहिये, सरगी वह भोजन है जिसे करवा चौथ का व्रत करने वाली महिलाऐं प्रातः काल उठकर स्नान आदि करके सूर्योदय से पहले अर्थात ब्रह्म मुहुर्त में खाती हैं इस भोजन में अलग-अलग तरह के फल शामिल होते हैं। यह सरगी बहुओं को अपनी सास से प्राप्त होती है। सरगी में कपड़े, सुहाग की वस्तुऐं, फल, सूखे मेवे, नारियल आदि होते हैं। इसी तरह करवा मिट्टी का कलशनुमा पात्र होता है इससे पूजन के पश्चात अर्ध्य दिया जाता है, करवा को भगवान गणेशजी का स्वरूप माना जाता है शास्त्रों के अनुसार इनके दान से सुख, सौभाग्य (सुहाग), अचल लक्ष्मी एवं पुत्र की प्राप्ति होती है। मान्यता व अटूट विश्वास है कि, करवा दान से व्रती के सारे मनोरथ पूरे होते हैं। आज के व्यस्त समय में कामकाजी महिलाओं को दोहरी भूमिका निभानी पड़ती है। करवा चौथ का व्रत महिलाओं का एक तरीका है अपने पति के लिये आभार प्रकट करने का जो उनके लिये सब कुछ करते हैं, पति-पत्नि के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक होता है करवा चौथ।
इसलिये इस दिन महिलाओं को यह व्रत अवश्य करना चाहिये क्योंकि यह देश सावित्री जैसी देवियों का है जो मृत्यु से भी अपने पति को खींच लाई थी।
