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शहर में कलाकारों की धूम के साथ डिफर (Diffr) के कलाकॉर्नर (कलाCorner) का सफल समापन
– डिफर गाला नाइट में जमकर थिरके कंटेस्टेंट्स; शानदार बैंड परफॉर्मेंस ने लूट ली महफिल
– ओपन स्टेज पर उठाया म्यूजिक, कॉमेडी, मिमिक्री, डांस और कविता आदि का भरपूर लुफ्त
इंदौर, 17 मार्च, 2024: इंदौरियों के दिलों में अपनी अलग छाप छोड़ते हुए डिफर (Diffr) द्वारा आयोजित ‘कलाकॉर्नर’ (कलाCorner) का सफल समापन हुआ। इसके तहत चर्चा कॉर्नर (चर्चाCorner) वर्कशॉप शहर की प्रतिभाओं को तराशने का सबसे सार्थक माध्यम रही। जीएसआईएमआर कॉलेज, होटल मैरियट के पास, विजय नगर, इंदौर में आयोजित इस टेड टॉक टाइप सेशन में बहुमुखी और हास्य प्रतिभा के धनी शिवांकित सिंह परिहार ने कंटेस्टेंट्स को अपने कॉमिक टैलेंट से मंत्रमुग्ध कर दिया। कॉमेडी स्केच के साथ ही उन्होंने कंटेस्टेंट्स विभिन्न वेब सीरीज़, शॉर्ट फिल्म्स और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी दी।
यह शहर में आयोजित अपने तरह का पहला इवेंट है, जिसमें आर्टिस्ट्स और क्रिएटर्स का अनूठा संगम देखने को मिला। अपने सफल आयोजन के साथ डिफर शहर की प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने का सार्थक माध्यम बना है। ऐसे में, यह उन लोगों के लिए आदर्श साबित हुआ है, जो क्रिएटिविटी के क्षेत्र में आगे आना चाहते हैं और अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं।
लगभग 1500 कंटेंस्टेंट्स ने इस वर्कशॉप में हिस्सा लिया और इसके माध्यम से उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। कंटेंस्टेंट्स ने बताया कि वर्कशॉप में उन्हें बारीक से बारीक जानकारी दी गई, जो कि आजकल आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती है।
गौरतलब है कि डिफर गाला नाइट में कंटेस्टेंट्स ने विविध प्रतिभाओं की एक जीवंत शाम का अनुभव किया। इस दौरान, शानदार बैंड परफॉर्मेंस ने सभी को अपनी तरफ आकर्षित करते हुए महफिल लूट ली। इसके साथ ही, डिफर ओपन स्टेज ने कब दर्शकों को अपना बना लिया, पता ही नहीं चला। कन्टेस्टेंस ने यहाँ म्यूजिक, कॉमेडी, मिमिक्री, डांस और कविता आदि का भरपूर लुफ्त उठाया। शाम को रंगीन करे हुए इस आयोजन में गतिविधियों की भरमार रही, जिसमें इंदौर के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों और मंत्रमुग्ध कर देने वाले बाँसुरी वादकों से लेकर खूबसूरत डांसर्स और भावपूर्ण गायकों तक, सभी ने दर्शकों को अपना बना लिया।
पहले दिन की वर्कशॉप एक्टिंग शाला (Actingशाला) में भारतीय फिल्म, टेलीविज़न व थिएटर एक्टर और डायरेक्टर राजेंद्र गुप्ता ने कंटेंस्टेंट्स को कैमरा, स्टेजक्राफ्ट और टेलीविज़न एक्टिंग टेक्निक्स के लिए बारीकी से जानकारी प्रदान की। ऐसे में, इस वर्कशॉप में हिस्सा लेने वाले कंटेंस्टेंट्स को बॉलीवुड इंडस्ट्री में शामिल होने के दौरान आने वाली मुश्किलों से निपटने के तौर-तरीके और इसमें शामिल होने के लिए जरुरी बातें सीखने को मिलीं।
*थियेटर और क्राफ्ट पर बोलते हुए अभिनेता शिवंकित सिंह परिहार ने कहा,* “एक एक्टर के लिए सबसे जरूरी है खुद को पहचानना कि आप किस तरह के एक्टर हो। क्या आप ऐसे एक्टर हो जिसको टाइम चाहिए कैरेक्टर में उतरने के लिए, या आप उस प्रकार के एक्टर हो कि आप लाइन याद कर के जाओगे और सीधा परफॉर्म करोगे। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आप रात भर रोने की प्रैक्टिस करते हो और सुबह सेट पर डायरेक्टर ने बोल दिया कि आपको सीन हंसते हुए करना है। तो उसमें कई बार आप फंस जाते हो इसलिए यदि आपने थियेटर कर के क्राफ्ट पर काम कर लिया तो आप हंसना और रोना आराम से स्विच कर सकते हैं। इसलिए मैं सिर्फ लाइंस याद कर के ही सेट पर जाता हूं। मुझे लगता है कि आपको यहां पर अपने फॉर्मूले बनाने होते हैं मैथ्स की तरह और खुद की पहचान करनी होती है।”
*मन मुताबिक किरदार मिलने को लेकर डिफर के फाउंडर पुल्कित जैन ने कहा कि* “वैसे तो मैं एक्टिंग में नहीं रहा, लेकिन डायरेक्शन में रहा हूं और मैंने बहुत बार देखा है कि जब आप वहां अंदर होते हैं तो आपको मनपसंद किरदार के रूप में काम मिलना आसान हो जाता है। चूंकि आप अंदर हो ही नहीं तो इसकी उम्मीद भी काफी कम हो जाती है। कई बार लोग असिस्टेंट डायरेक्टर से भी एक्टिंग का रुख कर लेते हैं। तो जरूरी है कि आप वहां अंदर काम की जगह पर हों।”
क्रिएटिविटी के सभी रूपों को शामिल करने वाले इस इवेंट में सभी के लिए कुछ न कुछ था, जिसमें कविता से लेकर संगीत तक, थिएटर से लेकर सिनेमा तक, लाइट्स से लेकर साउंड तक, की भरमार रही। ऐसे में, यह कार्यक्रम अभिनेताओं, मॉडल्स, फोटोग्राफर्स, वीडियो एडिटर्स, फोटोग्राफर्स, कॉन्टेंट राइटर्स, ग्राफिक डिजाइनर्स और अन्य सहित उन दर्शकों की जरूरतों को पूरा करने के अपने वादे पर खरा उतरा है।
