-बाजार न मिलने से सिरोंज के 40 में से 34 लूम बन्द हो चुके
सिरोंज । ऐतिहासिक नगर सिरोंज अपनी पहचान खुद होता जा रहा है जिससे देश एवं प्रदेश में मशहूर सिरोंज की दरिया हुआ करती थी लेकिन हथकरघा बुनकरों को काम न मिलने के कारण दरियों का कारोबार बिल्कुल ही खत्म होता जा रहा है तो वही अब नगर सिरोंज को दरियों का व्यापार में उम्मीद की किरण जागी है । वही शुक्रवार को 16 अमेरिकन्स टूरिस्ट का दल सिरोंज के दरी मोहल्ला आया। तंग गलियों में विदेशी देखकर हरकोई हक्का बक्का रह गया। टूर ऑर्गेनाइजर गोपाल राय ने बताया कि यह टेक्सटाइल टूर है, अमरीका के टेक्सटाईल एक्सपर्ट सिरोंज की दरियां खरीदने व देखने आए है। इससे पहले वे चंदेरी की साड़ियां देखने चंदेरी भी गए थे। भोपाल के जरदोसी, धार की बाघ प्रिंट व महेश्वर की साड़ियां देखने के बाद ये लोग अमरीका वापस रवाना होंगे।
टीम की लीडर जूडी अमरीका में बड़ा हेंडलूम स्टोर संचालित करती है। जुडी ने बताया कि वे हथकरघा कारीगरों के बीच जाकर देखना चाहती थी कि वे कैसे काम करते है। भारत के हेंडलूम व कारपेट की तारीफ करते हुए जुडी ने कहा कि यह सर्वोत्तम है।
दरी बनाने वाले हथकरघा बुनकर फरीद ने कहा कि अब मार्किट नहीं मिल रहा। हस्त शिल्प निगम व म प्र हथकरघा निगम ने माल लेना बंद कर दिया । जिस कारण सिरोज़ का दरी उधोग बंद होता जा रहा है।
मशहूर थी सिरोंज की दरियां-
सिरोज़ की सूत से बनी 100 कॉटन की दरी देश भर में प्रसिद्ध थी। पहले सिरोंज में 40 से ज्यादा लूम चलते थे। अब सिर्फ 6 बचे है ,जिन पर भी रोज काम नहीं होता। हथकरघा कारीगरों के बच्चे दूसरे धंधों व मेहनत मजदूरी करने लगे है। आज इन अमेरिकन्स ने सिरोंज की दरियां खरीदकर उम्मीद की किरण जगा दी है।
