नई दिल्ली । बालीवुड की फिल्म ‘शहंशाह’ का यह डायलाग्स ‘जिस दिन मैं कोई गोरी तितली देख लेता हूं न माथुर, मेरे खून में सैकड़ों काले कुत्ते भौंकने लगते हैं।’ मीम्स प्रेमियों के दिलों में इस सीन की खास जगह है। अपने जमाने के मशहू विलेन अमरीश पुरी और प्रेम चोपड़ा एक बार में बैठे हुए हैं। वेटर अमरीश पुरी को उनकी पसंदीदा शराब की पेशकश करता है लेकिन पुरी ‘ब्लैक डॉग’ की मांग करते हैं।
प्रेम चोपड़ा इसकी वजह पूछते हैं, जिसके जवाब में अमरीश पुरी एक टुच्चा सा डायलॉग बोलते हैं, हालांकि, अमरीश पुरी ब्लैक डॉग पीने की जो भी व्याख्या करें, लेकिन असलियत यही है कि इस मशहूर व्हिस्की का ब्लैक डॉग यानी काले कुत्ते से कोई संबंध नहीं है।ब्लैक डॉग एक ऐसा ब्रांड है, जो भारतीय शराब प्रेमियों के बीच दशकों से बेहद मशहूर है। तो इसका नाम ब्लैक डॉग पर कैसे पड़ा, आइए जानते हैं। दरअसल, इस नाम का कनेक्शन इस शराब को बनाने वाले शख्स सर वॉल्टर मिलर्ड की एक आदत से जुड़ा है। कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, मिलर्ड मछली पकड़ने के बहुत शौकीन थे। मछली पकड़ने के लिए वह एक स्पेशल किस्म का कांटा ‘फिशिंग फ्लाई’ का इस्तेमाल करते थे। इस फिशिंग फ्लाई को ही ब्लैक डॉग कहते हैं। अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि ब्लैक डॉग व्हिस्की की बोतल पर नाम के ठीक ऊपर मछली पकड़ने का वो कांटा एक लोगो की तरह बना हुआ है।
इसी फिशिंग फ्लाई से प्रेरित होकर व्हिस्की मेकर मिलर्ड ने 1883 में इस शराब ब्रांड की शुरुआत की। तो आप समझ गए होंगे इस मशहूर स्कॉच व्हिस्की ब्रांड को यह नाम कैसे मिला।ग्लोबल शराब कंपनी की इंडियन सब्सिडियरी डियाजियो इंडिया का ब्लैक डॉग ब्रांड पर मालिकाना हक है। यह कंपनी भारत में मैकडॉवेल नंबर 1, वैट-69, रॉयल चैलेंज, एंटीक्यूटी, स्मिरनॉफ, जॉनी वॉकर, ब्लैक एंड वाइट, सिग्नेचर, कैप्टन मोर्गन समेत कई ब्रांड के शराब बेचती है।
