CG Job Alert: छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी का मौका! मेडिकल कॉलेज के 448 पदों पर भर्ती का रास्ता खुला
Spread the loveबिलासपुर। छत्तीसगढ़ अंबिकापुर के राजमाता देवेंद्र...
Spread the loveबिलासपुर। छत्तीसगढ़ अंबिकापुर के राजमाता देवेंद्र...
Spread the loveदुर्ग – दुर्ग जिले की अहिवारा...
Spread the loveरायपुर। छत्तीसगढ़ में अपराध का ग्राफ...
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ अंबिकापुर के राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 448 पदों पर भर्ती के विज्ञापन रद्द करने के फैसले को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने मनमाना कार्रवाई करार दिया है।
हाई कोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 की सामान्य सभा के फैसले को निरस्त करते हुए पुरानी भर्ती प्रक्रिया उसी चरण से दोबारा शुरू करने और तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है, केवल भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने से नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलता, लेकिन चल रही भर्ती को बिना ठोस और उचित कारण के बीच में रद्द भी नहीं किया जा सकता।
448 पदों के लिए मिले थे 55,335 आवेदन
याचिकाकर्ताओं आदित्य सैनी, युवराज लिंगम, टिकेश्वर राम, सुभद्रा पैकरा, खेल साय, गौरव गोंड, दिलेश्वर राम, सोनम सिदार, प्रमोद जायसवाल और वृंदावती ने अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 20 जुलाई 2022 और वर्ष 2023 में जारी संशोधित विज्ञापनों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी।
चयन सूची तैयार होने के बाद 23 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन होना था, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। बाद में भर्ती रद्द कर छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से नई भर्ती कराने का निर्णय लिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि सामान्य सभा की बैठक में विभिन्न पदों के लिए एक लाख से अधिक आवेदन मिलने और भर्ती में ज्यादा समय लगने को विज्ञापन रद्द करने का आधार बताया गया था, जबकि महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने 19 जून 2025 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भेजे पत्र में तृतीय श्रेणी के 63 पदों के लिए 10,374 और चतुर्थ श्रेणी के 385 पदों के लिए 44,961 आवेदन दर्ज किए थे। यानी कुल 448 पदों के लिए 55,335 आवेदनों को शामिल किया गया था।
राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कहा, किसी अभ्यर्थी को भर्ती में शामिल होने या दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने भर से नियुक्ति का पक्का अधिकार नहीं मिलता। प्रशासन को भर्ती का तरीका बदलने का अधिकार है और फैसला संस्थागत हित में लिया गया था।
याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने कहा, सरकार भर्ती प्रक्रिया रद्द कर सकती है, लेकिन इसके लिए सद्भावनापूर्ण, तर्कसंगत और कानून के अनुरूप कारण होना जरूरी है। आवेदन संख्या में बड़े अंतर का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। यह भी नहीं बताया गया कि पुरानी प्रक्रिया पूरी करना असंभव क्यों था या उसे रद्द करना क्यों जरूरी था। भर्ती में किसी ऐसी अवैधता या प्रक्रिया संबंधी खामी का भी उल्लेख नहीं किया गया, जिसके कारण उसे बंद करना आवश्यक होता।
कोर्ट ने भर्ती रद्द करने का फैसला और उससे संबंधित कार्रवाई निरस्त कर अधिकारियों को पुरानी भर्ती विज्ञापन के आधार पर प्रक्रिया फिर शुरू करने का आदेश दिया है। अधिकारियों को पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन कर अभ्यर्थियों की तुलनात्मक मेरिट के अनुसार चयन करना होगा। निर्धारित नियमों के तहत पात्र और मेरिट के आधार पर नियुक्ति के हकदार अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया हाई कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने से तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
