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उज्जैन। नगर निगम द्वारा सिंहस्थ मेला क्षेत्र में साधु-संतों एवं विभिन्न समाजों के निर्माणों पर की जा रही तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर वार्ड क्रमांक 06 के पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। तिवारी ने महापौर को पत्र लिखकर निर्माण के समय अधिकारियों की लापरवाही और एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) के ठहराव का पालन न होने पर सवाल उठाए हैं।निर्माण रोकने में नाकामी की जवाबदेही तय करने की मांगपार्षद तिवारी ने कहा कि सिंहस्थ साधु-संतों और श्रद्धालुओं से जुड़ा धार्मिक आयोजन है। ऐसे में आश्रमों, मंदिरों और धर्मशालाओं को बिना संबंधित पक्षों का पक्ष सुने तोड़ना अनुचित है। जब आरक्षित भूमि पर निर्माण हो रहे थे, तब जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें समय पर क्यों नहीं रोका? केवल निर्माण ध्वस्त कर प्रशासन अपनी पिछली लापरवाही से बच नहीं सकता। निर्माण के समय तैनात अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।एमआईसी ठहराव और कानूनी प्रावधानों का हवालापत्र में मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292 (छ) तथा 23 नवंबर 2022 के एमआईसी ठहराव क्रमांक 64 का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश नगर पालिका मेयर इन काउंसिल (कर्तव्य) नियम 1998 की धारा 12 (1) के तहत एमआईसी के फैसलों का पालन न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।आरक्षित जमीनों के पुनरीक्षण की मांगतिवारी ने सिंहस्थ क्षेत्र के लिए आरक्षित जमीनों की वर्तमान स्थिति के आधार पर दोबारा समीक्षा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जमीनों को आरक्षित सूची से बाहर करने या उनके पुनश्चयन की प्रक्रिया पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।इस संबंध में ज्ञापन की प्रतियां संभागायुक्त, नगर निगम आयुक्त और क्षेत्रीय विधायक उज्जैन (उत्तर) को भी उचित कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
