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अंतिम दिन उमड़ी हजारों लोगों की भीड़, पारंपरिक मराठी व्यंजनों, लोकसंगीत, गोंधल और लावणी की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
इंदौर। महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और लोककलाओं की झलक पेश करने वाले ‘जत्रा मराठी वारसा फेस्टिवल-2026’ का तीसरे दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समापन हुआ। सर्व मराठी भाषीय सोशल एंड कल्चरल सोसायटी द्वारा आयोजित इस मेगा इवेंट में अंतिम दिन भी लोगों का उत्साह देखते ही बना। हजारों शहरवासी आयोजन में पहुंचे और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत, लोककला तथा पारंपरिक मराठी व्यंजनों का आनंद लिया।रविवार को दोपहर 2 बजे से ही आयोजन स्थल पर गतिविधियां शुरू हो गई थीं। शाम होते-होते स्टॉलों पर भीड़ बढ़ती गई और देर रात 12 बजे तक उत्सव का माहौल बना रहा। घरेलू महिलाओं द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजन, लोकसंगीत और आत्मीय वातावरण ने इस आयोजन को हर उम्र के लोगों के लिए यादगार बना दिया।पारंपरिक मराठी व्यंजनों का लिया स्वाद‘जत्रा’ में लगे खाद्य स्टॉल लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। घरेलू महिलाओं द्वारा बनाए गए पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से महाराष्ट्र के खान-पान की विविधता देखने को मिली। शहरवासियों ने व्यंजनों का स्वाद चखने के साथ मराठी संस्कृति और परंपराओं को करीब से जाना। अंतिम दिन बड़ी संख्या में परिवारों की मौजूदगी ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी।गोंधल और लावणी की प्रस्तुतियों ने बांधा समांफेस्टिवल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महाराष्ट्र की लोककलाओं ने दर्शकों का मन मोह लिया। गणेश वंदना के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में गायन और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह से भर दिया। महाराष्ट्र से आए करीब एक दर्जन लावणी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।इस दौरान स्वाति पुणेकर ने लावणी की प्रस्तुतियां देकर खूब सराहना बटोरी। वहीं श्रावनी बड़े की शानदार लावणी प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम आगे बढ़ने के साथ दर्शकों और कलाकारों के बीच उत्साह और तालमेल देखने को मिला। गोंधल सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने महाराष्ट्र की लोकपरंपराओं की खूबसूरती को मंच पर जीवंत किया।आयोजक स्वाति युवराज काशिद ने जताया आभारआयोजक स्वाति युवराज काशिद, अध्यक्ष सर्व मराठी भाषीय सोशल एंड कल्चरल सोसायटी, ने बताया कि अंतिम दिन दोपहर से ही कार्यक्रमों और स्टॉलों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। रविवार को शहरवासियों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर फेस्टिवल का आनंद लिया और देर रात तक उत्सव में सहभागिता की।उन्होंने कहा कि ‘जत्रा’ को इंदौरवासियों की ओर से भरपूर प्रतिसाद मिला। आयोजन का उद्देश्य महाराष्ट्र की संस्कृति, लोककला और पारंपरिक खान-पान को एक साझा मंच प्रदान करना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।‘जत्रा मराठी वारसा फेस्टिवल-2026’ ने स्वाद, संगीत, नृत्य और परंपराओं के संगम के जरिए इंदौर में महाराष्ट्र की सांस्कृतिक महक बिखेरी। तीन दिवसीय आयोजन का समापन शहरवासियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ हुआ।
