मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न
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नई दिल्ली ( ऊषा माहना/माधव एक्सप्रेस ): न्यूज़ 18 नेटवर्क और टाटा मोटर्स द्वारा आयोजित “देश के सुपर सारथी” कार्यक्रम में अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली अनुबंधित बस संघ के महासचिव डॉ. हरीश सभरवाल ने वाणिज्यिक वाहन चालकों (सारथियों) की वर्तमान स्थिति, सामाजिक सुरक्षा और उनके जीवन स्तर में सुधार पर प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए।“कार्यकुशलता और संवेदनशीलता के संगम से भारत के सारथियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य का निर्माण” विषय पर आयोजित इस परिचर्चा में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टमटा, अभिनेता रणदीप हुड्डा, सरकारी अधिकारियों और परिवहन जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया।डॉ. सभरवाल द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु एवं सुझाव:अर्थव्यवस्था की रीढ़: सारथी दिन-रात और विपरीत परिस्थितियों (जैसे कोविड महामारी) में भी आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखते हैं। उनके योगदान को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि धरातल पर उचित सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।चालकों की भारी कमी: देश में 3.5 करोड़ वाणिज्यिक वाहनों के मुकाबले केवल 1.8 करोड़ चालक उपलब्ध हैं। इस अंतर को मिटाने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं आवश्यक हैं।युवाओं के लिए प्रशिक्षण: आधुनिक तकनीक और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि युवा इस क्षेत्र को पेशे के रूप में अपना सकें।राजमार्गों पर मूलभूत सुविधाएं: राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पार्किंग, विश्राम गृह और भोजनालय की बेहतर व्यवस्था हो।मानवीय व्यवहार: पुलिस और आम जनता द्वारा चालकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।उचित आय और सामाजिक सुरक्षा: चालकों को उनकी मेहनत के अनुसार उचित वेतन, स्वास्थ्य बीमा, चिकित्सा सुविधा और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजनाएं प्रदान की जाएं।कॉर्पोरेट और सरकारी सहयोग: बड़ी कंपनियां अपनी सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) नीतियों के तहत चालकों के कल्याण के लिए काम करें और सरकार परिवहन संगठनों को योजनाओं के क्रियान्वयन में भागीदार बनाए। पहिया चलता है, तो देश चलता है। चालकों का सम्मान और उनकी खुशहाली पूरे देश के विकास से जुड़ी है। राजमार्गों के इन असली नायकों के जीवन में वास्तविक सुधार के लिए सरकार, उद्योग और परिवहन संगठनों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
