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पटना, 10 सितंबर ।
बिहार सहित देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 11 सितम्बर को अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल पर जा रहे हैं। बैंक प्रबंधन, वित्त मंत्रालय और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बीच दो दिनों से चल रही वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने और वार्ता विफल होने के बाद बैंक यूनियनों ने 11 सितम्बर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इसके बाद 12 सितम्बर को दूसरा शनिवार और 13 सितम्बर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश तथा 14 सितम्बर को गणेश चतुर्थी के कारण कुछ राज्यों में छुट्टी होने से लगातार चार दिन बैंक शाखाओं के काम प्रभावित हो सकते हैं। बिहार में इस बंदी से करीब 50 हजार करोड़ रुपये के वित्तीय कारोबार के प्रभावित होने का अनुमान है।
इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी ने बातचीत में बताया कि देशभर के करीब आठ लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारी इस हड़ताल में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि 28 से 30 सितम्बर तक दोबारा राष्ट्रव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। अगर केंद्र सरकार ने मांगों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला तो अक्टूबर के अंत से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था, अधिकारियों के लिए पीएलआई की समान व्यवस्था, आईडीबीआई बैंक के विदेशीकरण पर तत्काल रोक और लंबे समय से लंबित पेंशन अपडेशन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इस दौरान इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है। ग्राहक ऑनलाइन लेनदेन कर सकेंगे।
शाखाओं से नकदी की सप्लाई प्रभावित होने के कारण शनिवार और रविवार तक कई क्षेत्रों में एटीएम में नकदी की कमी हो सकती है।11 से 13 सितम्बर के दौरान बैंक शाखाओं में नकदी जमा-निकासी, ड्राफ्ट और चेक क्लियरेंस जैसी सेवाएं प्रभावित रहेंगी। बिहार की करीब 7,760 बैंक शाखाओं के कामकाज पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।हड़ताल के कारण आम ग्राहकों, कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर जिन लोगों को शाखा जाकर जरूरी बैंकिंग काम निपटाने हैं, उन्हें पहले से तैयारी करनी होगी।
