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पटना, 02 सितंबर । बिहार में लोगों को गंभीर बीमारी की स्थिति आने का इंतजार करने के बजाय समय रहते उसकी पहचान और उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बुधवार को राज्यव्यापी ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित कार्यक्रम में सभी 38 जिलों के लिए जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने अभियान की शुरुआत के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इस अभियान के तहत राज्य के करीब छह करोड़ लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कर उनका डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के निर्देशन में स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। बिहार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। अभियान का मूल उद्देश्य बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय उसकी समय रहते पहचान कर उपचार सुनिश्चित करना है।
सम्राट चौधरी ने कहा, “जांच इसलिए कराएं ताकि आप बीमार ही न पड़ें।” उन्होंने कहा कि बीमारी की पहचान समय पर होने पर ही उसका सही और प्रभावी इलाज संभव है। अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर प्राथमिक जांच और परामर्श देंगे। जरूरत पड़ने पर मरीजों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला अस्पताल तक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। अस्पतालों से मरीजों के रेफरल में कमी आई है और जिला अस्पतालों में सर्जरी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि जून में जिला अस्पतालों में 2,428 ऑपरेशन हुए थे, जबकि वर्तमान माह में यह संख्या बढ़कर 8,000 से अधिक हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला और अनुमंडल अस्पतालों में पहले 36 प्रकार की बीमारियों की सर्जरी की जा रही थी, जिसे बढ़ाकर अब 45 प्रकार की सर्जरी कर दिया गया है। इससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है और उन्हें इलाज के लिए दूसरे स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम होगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में एनीमिया की जांच के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत एक करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही पूरे बिहार में करीब छह करोड़ लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कर उनका हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने की योजना है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि स्वस्थ परिवार ही खुशहाल परिवार होता है और स्वस्थ एवं खुशहाल परिवारों से ही राज्य समृद्ध बनता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने को साकार करने के लिए बिहार के लोगों का स्वस्थ रहना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों समेत परिवार के प्रत्येक सदस्य को स्वस्थ रखने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने आम लोगों से अभियान में सक्रिय भागीदारी करने और अपनी स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की, ताकि किसी बीमारी का समय रहते पता लगाकर उसका उपचार शुरू किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मानव संसाधन को भी मजबूत किया जा रहा है। नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य उन्हें बेहतर प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे देश के अलावा विदेशों में भी रोजगार प्राप्त कर सकें।
उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए ‘मिशन कायाकल्प’ शुरू करने की भी बात कही। इसके माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) और स्वास्थ्य उपकेंद्रों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त एवं बेहतर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे लोगों को उनके नजदीक ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को अभियान की नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया, ताकि निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा हो और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने भी अपने विचार रखे।
