बारिश से शहर की सड़कें, गलियां जलमग्न, 12 मोहल्ले प्रभावित, 13 राहत शिविर सक्रिय, 139 से अधिक परिवारों ने ली शरण
वाराणसी, 01 सितंबर । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार को गंगा ने चेतावनी बिंदु पार कर लिया, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, राजघाट स्थित गेज साइट पर मंगलवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.28 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर है। दोपहर 12 बजे जलस्तर बढ़कर 70.29 मीटर पहुंच गया। गंगा का जलस्तर करीब आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। वाराणसी में खतरे का निशान 71.262 मीटर है, जबकि अब तक दर्ज उच्चतम बाढ़ स्तर 73.901 मीटर रहा है। मंगलवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 70.27 मीटर दर्ज किया गया था।
इधर, लगातार बारिश से शहर की सड़कें और गलियां जलमग्न हो गई हैं। मंगलवार सुबह आठ बजे तक वाराणसी में 33.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। अगस्त में भी जिले में 35 वर्षों के बाद सर्वाधिक बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर अगस्त में 245.1 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस वर्ष 448 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य से 82 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष अगस्त में 412 मिलीमीटर बारिश हुई थी। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक आसमान में बादल छाए रहने और बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। इससे गंगा के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब तटवर्ती मार्गों और घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। अस्सी घाट से नगवा मार्ग तथा अस्सी से जगन्नाथ मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका घाट जाने वाली गली भी जलमग्न हो गई है। शवदाह के लिए लोगों को ऊपरी प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
हरिश्चंद्र घाट पर भी गलियों में शवदाह की स्थिति बनी हुई है। वहीं, गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ सहायक नदी वरुणा भी उफान पर है। वरुणा के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। प्रभावित लोग आसपास के ऊंचे स्थानों के अलावा बाढ़ राहत शिविरों में भी पहुंच रहे हैं।
जिला आपदा प्रबंधन के बाढ़ बुलेटिन के अनुसार जिले में 12 मोहल्ले, वार्ड बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन की ओर से 13 सक्रिय बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। अब तक बाढ़ प्रभावित 139 से अधिक परिवार राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।