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452 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता जरूरी, करीब 200 के आवेदन मिले, जिलाधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश
देहरादून, 01 सितंबर । उत्तराखंड सरकार ने मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपना रुख और कड़ा कर दिया है। राज्य में अब वही मदरसे संचालित हो सकेंगे जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता हासिल करेंगे और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होंगे। मान्यता नहीं लेने वाले मदरसों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद किया जाएगा।
मदरसों को लेकर सरकार की सख्ती के बीच रुद्रपुर में जश्न-ए-मोहम्मदी जुलूस के दौरान त्रिशूल चौक पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला भी सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने संबंधित मौलवी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने उसके मदरसे को सील कर दिया था। प्रशासन की ओर से बताया गया था कि संबंधित मदरसा निर्धारित मान्यता के बिना संचालित हो रहा था और लागू नियमों का पालन नहीं कर रहा था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली किसी भी गतिविधि के प्रति सरकार की सख्त नीति दोहराई है। मुख्यमंत्री के अनुसार देवभूमि में ऐसी शिक्षा व्यवस्था को स्थान नहीं दिया जाएगा जो कट्टरता को बढ़ावा दे।
उन्होंने कहा है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम-कानून सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे और उनका पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के इस फैसले के बाद अब निगाहें उन 452 पूर्व पंजीकृत मदरसों पर हैं, जिनमें से करीब 200 ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच के बाद यह तय होगा कि कौन से मदरसे नए मानकों पर खरे उतरते हैं और किन संस्थानों पर कार्रवाई की गाज गिरती है।
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्रदेश में पूर्व में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत 452 मदरसों को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत मान्यता लेनी होगी। उन्होंने कहा कि जो मदरसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं लेंगे, उन्हें संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अब तक करीब 200 मदरसों के ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इन आवेदनों के आधार पर संबंधित मदरसों का स्थलीय निरीक्षण कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम से जुड़ना होगा,धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम भी प्राधिकरण के दायरे में: सरकार ने मदरसों के लिए केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित व्यवस्था के बजाय औपचारिक शिक्षा व्यवस्था के मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया है। अधिकारियों के अनुसार मान्यता के साथ मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध करानी होगी।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि मान्यता के लिए मदरसों को अपने भवन, कक्षों की क्षमता, विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था, बिजली, पेयजल और शौचालय सहित मूलभूत सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा मदरसा संचालकों से बैंक खाते और संस्थान को प्राप्त होने वाली आर्थिक सहायता का विवरण भी मांगा जाएगा। प्राधिकरण इन सभी पहलुओं की जांच के बाद मान्यता पर निर्णय करेगा
प्रो. गांधी ने कहा कि मदरसों में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा से संबंधित पाठ्यक्रम भी प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का दायरा केवल मुस्लिम संस्थानों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि सिख, बौद्ध और ईसाई संस्थानों को भी इसके दायरे में शामिल किया जाएगा।
