नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारा संकल्प : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में 1 अगस्त 2026 से प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली कंपनी ने पुराने बकाये की वसूली तेज कर दी है। जून 2026 तक प्रदेश के सरकारी विभागों पर 3035.37 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया है। इसमें करीब 85% यानी 2582.74 करोड़ रुपए नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के हैं।
वसूली के लिए पावर वितरण कंपनी ने नगरीय निकायों से जुड़े स्ट्रीट लाइट, पानी की टंकियों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के बिजली कनेक्शन काटने शुरू कर दिए हैं। बिलासपुर नगर निगम में हाल ही में कुछ कनेक्शन काटे गए। वहीं हाउसिंग बोर्ड पर भी बकाया जमा करने का दबाव बनाया गया है। इसके बाद हाउसिंग बोर्ड ने कॉलोनियों के रहवासियों को पानी और सफाई शुल्क जमा करने के नोटिस जारी किए हैं।
पावर कंपनी के अनुसार सरकारी विभागों के 1,57,341 कनेक्शनों पर 3035.37 करोड़ रुपए बकाया हैं। इनमें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के 19,060 कनेक्शनों पर 1525.18 करोड़ रुपए और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 57,075 कनेक्शनों पर 1057.56 करोड़ रुपए बकाया हैं। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर 111.42 करोड़, स्कूल शिक्षा पर 83.39 करोड़ और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग पर 40.70 करोड़ रुपए बकाया हैं।
प्रदेश में करीब 65 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। फिलहाल प्रीपेड व्यवस्था ब्लॉक और उससे ऊपर स्तर के सरकारी कार्यालयों में लागू की गई है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इसे लागू करने का फैसला अभी नहीं हुआ है।
नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव ने सभी निकायों को पुराने बिजली बकाये का चार समान किस्तों में भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रीपेड मीटर का नियमित रिचार्ज कराने को कहा गया है। निकायों को हर महीने 5 तारीख तक सूडा को रिचार्ज और बकाया भुगतान की जानकारी देनी होगी।
नियम के मुताबिक सरकारी विभाग और स्थानीय निकाय भी बिजली कंपनी के उपभोक्ता हैं। बिल जमा नहीं करने पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 56 और छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड के तहत नियमानुसार कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है।
