संजय अग्रवाल की अपील
इंदौर। गणेश उत्सव और नवरात्रि से पहले प्रशासन द्वारा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) तथा रासायनिक मूर्तियों पर रोक लगाकर पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं की अनुमति दी गई है। वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने इस कदम का स्वागत करते हुए दोनों पर्वों में केवल मिट्टी और गोबर से निर्मित मूर्तियों की बिक्री एवं स्थापना की मांग की है।
अग्रवाल के अनुसार, मिट्टी और गोबर भारतीय परंपरा और पर्यावरण के अनुकूल हैं। गोबर मिश्रित मूर्ति विसर्जन के बाद जल को प्रदूषित किए बिना खाद के रूप में धरती को उपजाऊ बनाती है। बच्चों से मूर्ति बनवाकर भावनात्मक जुड़ाव पैदा करने का आग्रह
श्री अग्रवाल ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे बच्चों से स्वयं मूर्ति निर्माण करवाएं और उसी की स्थापना करें। उनका मानना है कि बच्चे जब अपने हाथों से मिट्टी और गोबर से गणेश या दुर्गा की मूर्ति बनाएंगे, तो उनमें भगवान के प्रति गहरा भावनात्मक जुड़ाव और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी।
बाजार से तैयार चमकदार मूर्तियां खरीदने से यह प्रक्रिया यांत्रिक हो जाती है। स्वयं मूर्ति बनाने से बच्चों को यह अनुभव होता है कि भगवान प्रकृति से जुड़े हैं और विसर्जन के बाद पुनः मिट्टी में विलीन हो जाते हैं।
प्रशासन के निर्णय और सामाजिक जिम्मेदारी
प्रशासन ने मूर्तिकार संघ के साथ बैठक कर पारंपरिक मिट्टी, प्राकृतिक रंग और कागज के उपयोग का निर्देश दिया है तथा बाहर से POP मूर्तियां लाने पर रोक लगाई है। अग्रवाल ने इसे सही दिशा बताते हुए समाज से इस पहल को और आगे बढ़ाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में प्राकृतिक सामग्रियों जैसे पंचगव्य, गोबर और मिट्टी के उपयोग का उल्लेख है। रासायनिक रंग और POP न तो शास्त्रसम्मत हैं और न ही पर्यावरण अनुकूल। अग्रवाल के अनुसार,असली परिवर्तन घरों से शुरू होना चाहिए, जहां हर परिवार बच्चों को मूर्ति निर्माण से जोड़े, जिससे जल स्रोतों का संरक्षण हो सके और नई पीढ़ी में आस्था के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागृत हो।