नई दिल्ली । जहाँ एक ओर राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे विपक्षी दलों के साथ सीजेपी के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर मोदी सरकार को घेरने में व्यस्त थे, वहीं दूसरी ओर संसद परिसर में हुई मुलाकात ने पूरे घटनाक्रम का केंद्र बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की बैठक की तस्वीरें सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। इन तस्वीरों में दोनों नेताओं को मुस्कुराते हुए बातचीत करते देख सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन की बेचैनी बढ़ गई है। यह मुलाकात उस संवेदनशील समय पर हुई है जब पिछले कई दिनों से शरद पवार गुट के एनडीए में शामिल होने या अपने भतीजे अजित पवार के गुट के साथ फिर से एकजुट होने की अटकलें तेज हैं। प्रधानमंत्री आवास से आई इन तस्वीरों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।
तस्वीरों में प्रधानमंत्री मोदी को स्वयं शरद पवार का स्वागत करते और दोनों नेताओं को सौहार्दपूर्ण मुद्रा में बातचीत करते देखा जा सकता है, जो राजनीति में अक्सर शब्दों से अधिक संदेश देती हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद से कयासों का बाजार गर्म है। सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर मंथन जारी है। चर्चा है कि शरद और अजित पवार के गुट पहले एक हो सकते हैं, इसके बाद एनडीए में शामिल होने की संभावना पर विचार होगा। यदि विलय नहीं भी होता है, तब शरद पवार गुट के अलग से एनडीए में शामिल होने या बाहर से समर्थन देने जैसे विकल्पों पर भी गंभीर बातचीत चल रही है। दावा है कि अगले 8 से 15 दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। पार्टी के भीतर कई विधायक और सांसद मानते हैं कि सत्ता से दूर रहने की बजाय सरकार का हिस्सा बनने से पार्टी और संगठन को लाभ होगा, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा। यह कदम महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक ला सकती है, जिसके लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। शरद गुट के पास लोकसभा में 8 और राज्यसभा में 1 सांसद हैं, जिनका समर्थन ऐसी स्थिति में निर्णायक हो सकता है। हालांकि, एनसीपी (एससीपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के रुख को लेकर चल रही कई खबरें अटकलों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक महत्व के किसी भी मुद्दे पर फैसला पार्टी के भीतर चर्चा और इंडिया गठबंधन के सहयोगियों से परामर्श के बाद होगा। दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार ने खुद इन अटकलों को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। जब उनसे पार्टी में टूट या एनडीए में जाने की संभावना पर सवाल पूछा गया, तब उन्होंने सिर्फ इतना कहा, अभी इस विषय पर बात करने का समय नहीं है। राजनीति में उनकी यह चुप्पी भी कई अर्थों में देखी जा रही है।
महाराष्ट्र में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान इंडिया गठबंधन ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया था और शरद उसकी सबसे मजबूत कड़ियों में से एक थे। इसके बाद उनके रुख में किसी भी बदलाव का सीधा असर विपक्षी एकता पर पड़ सकता है। फिलहाल न शरद पवार ने कोई औपचारिक घोषणा की है और न ही भाजपा या एनडीए की ओर से कोई पुष्टि हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी हाई-प्रोफाइल मुलाकात और उसके बाद आई तस्वीरों ने इतना अवश्य कर दिया है कि अब राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती सियासत और उसके इंडिया गठबंधन पर संभावित प्रभाव बन गया है।