विशेष संवाददाता, इंदौर
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में सरकार की सक्रियता तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में समान नागरिक संहिता और एक विवाह सिद्धांत की वकालत करने वाले बयान के बाद इस पर सामाजिक और राजनीतिक विमर्श तेज हो गया है। इस बीच, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन (मध्य प्रदेश) ने सरकार के इस रुख का औपचारिक स्वागत किया है।
फैडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने एक बयान जारी कर कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का कदम सामाजिक सुधार, महिला सशक्तिकरण और कानूनी एकरूपता की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित होगा।
कानून लागू होने से संभावित प्रशासनिक व कानूनी बदलाव:
संस्था द्वारा जारी विश्लेषण के अनुसार, यदि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होती है, तो वैधानिक व्यवस्था में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
विवाह और पारिवारिक कानून में एकरूपता: संहिता लागू होने के बाद सभी समुदायों के लिए एक विवाह का नियम अनिवार्य रूप से प्रभावी होगा। इसके साथ ही बाल विवाह और जबरन विवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाने के लिए सभी धर्मों के अंतर्गत होने वाले विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) आवश्यक किया जाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप का विनियमन: प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है। ऐसे संबंधों से उत्पन्न बच्चों को माता-पिता की पैतृक संपत्ति में पूर्ण कानूनी अधिकार देने का प्रावधान शामिल है, जिससे भविष्य के कानूनी विवादों को कम किया जा सके।
महिला अधिकारों का संरक्षण: उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में बेटियों को बेटों के समान अधिकार प्राप्त होंगे। इसके अलावा, तलाक और भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) के नियमों को भी सभी नागरिकों के लिए एक समान और लैंगिक न्याय पर आधारित बनाया जाएगा।
जनजातीय परंपराओं को संरक्षण: फेडरेशन ने मुख्यमंत्री के उस स्पष्टीकरण की भी सराहना की है, जिसमें जनजातीय (आदिवासी) समुदायों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को इस कानून के दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है।
व्यापक जन-परामर्श पर जोर
संजय अग्रवाल ने बताया कि सरकार द्वारा इस कानून के प्रारूप को तैयार करने के लिए लाखों की संख्या में जनता और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जो इसके लोकतांत्रिक स्वरूप को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश भी इस दिशा में आगे बढ़ते हुए कानून व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल व प्रभावी बनाएगा।
फेडरेशन ने समाज के सभी वर्गों से कानून और व्यवस्था के सरलीकरण तथा सामाजिक समरसता के हित में इस प्रस्तावित सुधार का सकारात्मक समर्थन करने की अपील की है।