तेलअवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि दुनिया में इजरायल का सबसे बड़ा और लगभग एकमात्र मजबूत सहयोगी केवल अमेरिका है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल के संबंध केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत सहित कई अन्य देशों के साथ भी उसके मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते हैं।
एक अमेरिकी टीवी कार्यक्रम में बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल को भारत जैसे बड़े लोकतंत्र से भी महत्वपूर्ण समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 1.4 अरब लोग रहते हैं और वहां से इजरायल को व्यापक स्तर पर सहयोग और समर्थन प्राप्त होता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल के कई मित्र देश हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में उसके साथ सहयोग कर रहे हैं। नेतन्याहू ने यह दावा भी खारिज किया कि इजरायल के पास अन्य कोई प्रभावशाली साझेदार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई देशों के साथ इजरायल के मजबूत संबंध हैं, चाहे वह तकनीकी सहयोग हो या रक्षा क्षेत्र में साझेदारी। उन्होंने विशेष रूप से इजरायल की साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीक का उल्लेख करते हुए कहा कि कई देश इजरायल की विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय नेता व्यक्तिगत रूप से उनसे संपर्क करते हैं और इजरायल के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताते हैं। उनके अनुसार, कुछ देश भले ही सार्वजनिक रूप से अलग रुख दिखाते हों, लेकिन निजी स्तर पर वे इजरायल की तकनीकी क्षमता और सैन्य अनुभव से सीखना चाहते हैं। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में इजरायल की स्थिति बेहद मजबूत मानी जाती है। इस बीच, नेतन्याहू के कार्यालय ने जानकारी दी है कि वह आगामी 13 जुलाई को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में ईरान से जुड़े मुद्दों, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और सऊदी अरब के साथ संबंधों को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। बताया गया है कि हाल ही में दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत के दौरान इस मुलाकात पर सहमति बनी थी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नेतन्याहू का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने इजरायल के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बहुआयामी बताते हुए भारत की भूमिका को भी अहम बताया है।