माधव एक्सप्रेस,रीवा/ सागर/मध्यप्रदेश और विंध्य क्षेत्र की शान व प्रतिष्ठा का पर्याय, दुनिया का पहला व्हाइट टाइगर ‘मोहन’, जिससे समूचे भारत वर्ष के जंगलों में रह रहे बाघों के दस्तावेजीकरण के युग का सूत्रपात हुआ है। वह जंगल की मांद में तब तक सिमटा,सिमटा, सकुचा, सकुचा पड़ा रहा हैं, जब तक रीवा राज्य के अंतिम शासक महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव की निगाहें उससे दो-चार नहीं हुई थी।
यह एक इत्तफाक ही है कि अपने हाथों से सैंकड़ों बाघों का आखेट कर चुके रीवा राज्य के अंतिम शासक महाराजा मार्तण्ड सिंह जू देव ने जब अपने जंगल शिकारगाह में कुदरत की तख़लीक का करिश्मा दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर मोहन को कुदरत की अद्भुत देन के रूप में पहली बार रूबरू देखा था तो उनका मन बाघ हिंसा से द्रवित हो उठा था। उन्होंने अपने हाथों से बंदूक को गिराकर मौर्य सम्राट अशोक की तरह ही ‘अहिंसा परमो धर्म:’ की राह पर चलकर न केवल दुनिया की विरल बाघ प्रजाति के बाघ मोहन का संरक्षण ही किया वरन अपने राज्य के एतिहासिक गोविंदगढ़ राज महल को सफेद बाघों का महल भी बना दिया था।
लगभग एक पूरी शताब्दी जंगल की आखेट कथाओं में रहे आए दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर ‘मोहन’ की मांद से लेकर गोविंदगढ़ राजमहल में आने तक की सर्वथा अनजानी व अनकही दास्तां अब शीघ्र ही वन्य प्रेमियों और पर्यटकों को पूरी प्रामाणिकता के साथ ‘व्हाइट टाइगर, कुदरत की तख़लीक़ का करिश्मा’ किताब में, दुर्लभ चित्रों के साथ देखने और पढ़ने को मिलेगी।
‘व्हाइट टाइगर, कुदरत की तख़लीक़ का करिश्मा’
मध्यप्रदेश शासन द्वारा एक लाख रुपए की सम्मान निधि के साथ प्रदत्त ‘बनारसी दास चतुर्वेदी पत्रकारिता सम्मान’ से सम्मानित विंध्य क्षेत्र के शीर्षस्थ वरिष्ठ पत्रकार, लेखक उमाशंकर तिवारी द्वारा रीवा के व्हाइट टाइगर पर किए गए वर्षो के लम्बे शोध व अनुसंधान के बाद लिखी गई एक किताब ही नहीं है बल्कि दुनिया के पहले सफेद बाघ मोहन और उसके वंशजों का एक रोमांचक जिंदगी नामा भी है। जो कि अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर ज्ञानमुद्रा पब्लिकेशन के सौजन्य से प्रकाशित होने जा रही है।
देश के प्रतिष्ठित ‘ज्ञान मुद्रा पब्लिकेशन’ के पब्लिशर वरुण महेश्वरी के अनुसार दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर मोहन ने कुशल बाघ शिकारियों में रहे रीवा राज्य के शासक महाराजा मार्तण्ड सिंह जू देव को अपने मोहक रूप सौंदर्य के मोहपाश में ऐसा बांधा था कि वह बंदूक पर हाथ लगाना ही भूल गए थे उनका दिल पूरी उम्र सफेद बाघ मोहन के प्यार में बँधा रहा, उसका दीवाना बना रहा। पब्लिशर्स वरुण महेश्वरी जी के अनुसार ही रीवा राज्य के अंतिम शासक व सफेद बाघों के संरक्षक महाराजा मार्तण्ड सिंह जू देव के ऐसे अनेकों रोचक व रोमांचक संस्मरणो से लबरेज ग्यारह अध्यायों की यह किताब ‘व्हाइट टाइगर, कुदरत की तख़लीक़ का करिश्मा’ प्रकाशन के पूर्व ही वन्य प्रेमी व देशी- विदेशी पर्यटकों की पसंद बनती जा रही है।
