संजय अग्रवाल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्षी दलों द्वारा भूमि खरीद, हितों के टकराव और संपत्ति में वृद्धि के जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह से तथ्यों से परे और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं। मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे ये मुद्दे दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने कहीं नहीं टिकते।
दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से उनके कार्यकाल में प्रदेश ने विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सरकार की जनहितैषी नीतियों के कारण धरातल पर आ रहे सकारात्मक बदलावों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष द्वारा इस तरह के भ्रामक आरोप लगाए जा रहे हैं।
आरोपों की वास्तविकता: तथ्यों पर आधारित विश्लेषण
अपरिवर्तित संपत्ति विवरण: वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान डॉ. मोहन यादव द्वारा दाखिल चुनावी हलफनामे में उनकी कृषि भूमि का स्पष्ट और पारदर्शी विवरण दिया गया था, जिसका तत्कालीन मूल्यांकन लगभग 17.96 करोड़ रुपये था। वर्तमान समय (जून 2026) तक इस परिसंपत्ति में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री अथवा उनकी पत्नी श्रीमती सीमा यादव के नाम पर किसी भी नई कृषि भूमि की खरीद नहीं की गई है।
कॉरपोरेट हितों के दावों की सच्चाई: ‘सिद्धि विनायक देव कांग प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी के संदर्भ में फैलाए जा रहे भ्रम की वास्तविकता यह है कि यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के लिए स्थापित की गई थी। डॉ. मोहन यादव और उनकी पत्नी वर्ष 2017 में ही इसके निदेशक पद से मुक्त हो चुके थे। मार्च 2026 में उन्होंने कंपनी में अपने रहे-सहे शेयर भी त्याग दिए। इसके अतिरिक्त, कंपनी के स्वामित्व वाली भूमि में कमी आई है, कोई वृद्धि नहीं हुई है।
पारिवारिक संपत्तियों का पृथक्करण: मुख्यमंत्री अपने भाइयों और अन्य रिश्तेदारों से संपत्ति के मामले में काफी समय पहले ही कानूनी रूप से अलग हो चुके हैं। उनके भाइयों या अन्य करीबियों द्वारा की जा रही किसी भी स्वतंत्र व्यावसायिक गतिविधि या भूमि खरीद को मुख्यमंत्री के पद से जोड़ना न्यायसंगत नहीं है।
मास्टर प्लान और पूर्व की खरीदारियां: उनके पुत्र द्वारा की गई भूमि की खरीदारियां उनके मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले की हैं। इसी तरह, ‘उज्जयिनी मास्टर प्लान 2035’ भी उनके कार्यभार संभालने से पहले ही प्रभावी हो चुका था। क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य इसी पूर्व-निर्धारित योजना के अनुरूप हैं, न कि किसी तात्कालिक प्रभाव या पद के दुरुपयोग के कारण।
महत्वपूर्ण तथ्य: जब कोई व्यक्ति वैधानिक रूप से अपने परिवार के अन्य सदस्यों से संपत्ति और व्यवसाय में अलग हो चुका हो, तब रिश्तेदारों के स्वतंत्र निर्णयों के लिए उसे उत्तरदायी ठहराना कानून और तर्क दोनों के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
रचनात्मक राजनीति की आवश्यकता
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन (मध्य प्रदेश) का यह स्पष्ट मत है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, प्रामाणिकता और सुचिता सबसे महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे और सार्वजनिक दस्तावेजों में अपनी संपत्तियों का पूरा विवरण प्रस्तुत किया है, जो कि सार्वजनिक डोमेन में समीक्षा के लिए उपलब्ध है।
हम विपक्षी दलों और मीडिया के उत्तरदायी धड़ों से यह आग्रह करते हैं कि वे केवल राजनीतिक लाभ के लिए आधे-अधूर और भ्रामक तथ्यों के आधार पर नैरेटिव बनाने के बजाय प्रमाणिक और विकासात्मक मुद्दों पर स्वस्थ बहस करें। मध्य प्रदेश की प्रबुद्ध जनता सच्चाई को समझने और भ्रामक दुष्प्रचार को खारिज करने में पूरी तरह सक्षम है।
( लेखक
संजय अग्रवाल
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हैं ।)
