नई दिल्ली,। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में गुरुवार को एआईसीसी मुख्यालय में पार्टी के महासचिवों, प्रभारियों और पीसीसी अध्यक्षों की अहम बैठक हुई। बैठक में राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और कई अन्य नेता मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं की यह अहम बैठक हालिया विधानसभा चुनावों और टीएमसी में चल रही फूट के बीच हुई। इस बैठक से एक दिन पहले वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा के लिए यह आपात बैठक बुलाई गई है। जानकारी के मुताबिक गुरुवार को हुई बैठक में मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा बीजेपी द्वारा केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने के प्रचार अभियान और पीएम नरेंद्र मोदी के जवाहरलाल नेहरू का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ने से जुड़े राजनीतिक विमर्श का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा की। पार्टी नेतृत्व दल-बदल की बढ़ती घटनाओं और विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने के मुद्दे पर भी विचार किया गया। राज्यों में संभावित सहयोगी दलों के साथ तालमेल बढ़ाने और विपक्षी गठबंधन के विस्तार को लेकर मंथन हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा है कि इस बैठक में टीएमसी के कुछ सांसदों के लोकसभा में अलग समूह के रूप में बैठने और बीजेपी नीत सरकार की प्राथमिकताओं के साथ जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस विपक्षी एकजुटता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई। यह बैठक सोमवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद आयोजित की गई थी। बैठक के बाद खड़गे ने कहा था कि इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां राष्ट्रीय मुद्दों पर बेहतर समन्वय के लिए हर दो महीने में बैठक करेंगी। गठबंधन की अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में होगी। खड़गे ने बताया कि इंडिया गठबंधन ने एसआईआर, चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने का फैसला किया है। साथ ही विपक्षी दलों ने नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
