नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास और पर्यटन की नई पहचान बनाएगा: गृह मंत्री अमित शाह
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नई दिल्ली,। भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की युद्धक क्षमता को मजबूत करने वाली सबसे अहम परियोजनाओं में से एक—तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमान की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा की जा रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठा। रक्षा मंत्री ने एचएएल द्वारा वर्तमान में चलाई जा रही सभी प्रमुख परियोजनाओं के प्रदर्शन की व्यापक और गहन समीक्षा की। बैठक में सीडीएस जनरल एन एस राजा सुब्रमणि, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवि कोटा शामिल हुए। बताया जा रहा है कि रक्षा मंत्री सिंह ने एचएएल के शीर्ष अधिकारियों से कहा कि प्रमुख परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक समय-सीमा तय की जानी चाहिए। मामले से अवगत अधिकारियों ने बताया कि तेजस मार्क 1ए विमानों की आपूर्ति में देरी के संदर्भ में सिंह ने सुझाव दिया कि एचएएल और भारतीय वायुसेना लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए बैठकर बात करें। विमानों की आपूर्ति में इसलिए देरी हुई है क्योंकि भारतीय वायुसेना ने कहा है कि निर्मित विमान कुछ तकनीकी मानकों को पूरा नहीं करते। विमानों की आपूर्ति में देरी का एक प्रमुख कारण यह रहा कि जीई एयरोस्पेस ने इन विमानों को शक्ति देने वाले इंजनों की आपूर्ति समय-सीमा में नहीं की। अमेरिका की रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी अब तक छह इंजन आपूर्ति कर चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि एचएएल कम से कम 18 तेजस मार्क 1ए विमानों का उत्पादन पूरा कर चुका है और यदि एयरोस्पेस कंपनी को इंजन मिल जाते हैं, तो इन सभी विमानों की आपूर्ति इस साल किए जाने की उम्मीद है। भारतीय वायुसेना का कहना है कि वर्तमान में निर्मित विमान कुछ तय तकनीकी मानकों और जरुरतों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें बेड़े में शामिल करने में समय लग रहा है। इस पर रक्षा मंत्री ने सुझाव दिया कि एचएएल और वायुसेना के अधिकारी एक साथ बैठकर इन लंबित मुद्दों का तुरंत समाधान निकालें। विमानों की डिलीवरी लटकने का एक और बड़ा कारण अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस द्वारा समय पर इंजनों की आपूर्ति न करना है।
