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रायपुर, 06 जून 2026


प्रदेश के ग्रामीण किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि के साथ ही अन्य व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुंद जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन से ग्रामीणों की आजीविका से जोड़ा गया है। जिले में करीब 1,78,533 गौवंशीय एवं 12,776 भैंसवंशीय सहित कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है। जिले में वर्तमान में दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय लगातार प्रगति पर है तथा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का क्रय-विक्रय किया जा रहा है।
पशुधन विकास विभाग क जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बेहतर दर एवं समय पर भुगतान कर बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों में हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा प्रतिदिन 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा प्रतिदिन 1000 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इस प्रकार निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है। देवभोग दुग्ध महासंघ एवं निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष की तुलना में अधिक है।
यहां जिले में किसानों को दुग्ध विपणन का कार्य में दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ा गया है। पहले 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित है, वहीं शासन की सहकारिता से समृद्धि की मंशानुरूप 25 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालक किसानों को उन्नत हरा चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है। हरा चारा एवं साईलेज पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु साईलेज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म, सेमरिया जिला रायपुर का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पशुपालकों को नेपियर, बरसीम, अजोला आदि हरे चारे के उपयोग हेतु कृषक संगोष्ठियों के माध्यम से लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
जिले में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने हेतु कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है। इस तकनीक से अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा पशुपालकों को उन्नत नस्ल की दुधारू गायें प्राप्त होंगी।
जिले में महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़ने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इसी प्रकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (छक्क्ठ) द्वारा महासमुंद जिले के 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।
