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नई दिल्ली,। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का नाम लिए बगैर भारत के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि अगर मीडिया और समाज युवाओं को अच्छी उपलब्धियों और सकारात्मक कामों को नहीं दिखाएगा तो युवा निराश होकर इंटरनेट के भ्रामक ट्रेंड्स या कॉकरोच के पीछे चलने लगेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को सही राह दिखाने और लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए रचनात्मक पत्रकारिता जरूरत है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक समारोह में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए राधाकृष्णन ने कहा कि सकारात्मक विकास पर मीडिया में ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे युवाओं को सही जानकारी और आदर्श मिल सकें। उन्होंने कहा कि सकारात्मक कामों की अच्छी तरह से रिपोर्टिंग की जानी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी, वरना वे रुचि खो देंगे और ‘कॉकरोच’ की राह पर चल पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की लीडरशिप में भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, ऐसे में जिम्मेदार मीडिया संस्थानों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। उन्होंने कहा कि हम 2047 तक सबसे विकसित देश बनना चाहते हैं। समाज के हर वर्ग के योगदान के बिना यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्होंने उन मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया, जो समय की कसौटी के हिसाब से जरूरी नहीं हैं। जाहिर तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर खाततौर से युवाओं के बीच सोशल मीडिया सेंसेशन का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में कोई चीज एक ही दिन में इतना ध्यान आकर्षित करने लायक है। उन्होंने कहा कि अगर कोई चीज वाकई अच्छी है तो लोग एक हफ्ते 10 दिन या यहां तक कि एक महीने बाद भी उसके महत्व को पहचानते रहेंगे। राधाकृष्णन ने सीजेपी का नाम लिए बगैर कहा कि उनके बारे में कोई नहीं जानता। अचानक, वे हर जगह फैल गए हैं। यह ज्यादा समय तक नहीं चल सकता। उन्होंने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि नेक विचार और सकारात्मक संदेश समाज के हर कोने तक पहुंचने चाहिए और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। बता दें भारत के चीफ जस्टिस के कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान कॉकरोच और परजीवी को लेकर की गई एक टिप्पणी पर हुए विवाद के बाद कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पर यह व्यंग्यात्मक मंच सामने आया। हालांकि बाद में, सीजेाई सूर्यकांत ने साफ किया कि फर्जी डिग्रियों के जरिए विधि पेशे में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों को लेकर उनकी ओर की गई टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया।
