इंदौर: 25 मई को हर साल वर्ल्ड थायराइड डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों में थायराइड स्वास्थ्य और उससे जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। थायराइड रोग दुनिया भर में पाए जाने वाले सबसे सामान्य हार्मोन संबंधी रोगों में शामिल हैं, जो हर आयु वर्ग के लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। इतनी आम बीमारी होने के बावजूद आज भी लोगों के बीच थायराइड को लेकर कई मिथक, डर और गलतफहमियां मौजूद हैं। जागरूकता की कमी के कारण कई बार बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो जाती है। इसलिए थायराइड रोगों से जुड़े तथ्यों को समझना बेहतर स्वास्थ्य और समय पर इलाज के लिए बेहद जरूरी है। *यहाँ मेदांता हॉस्पिटल इंदौर के एंडोक्रिनोलॉजी और डायबिटीज कंसल्टेंट डॉ. राहुल चऊदा* ने थायराइड को लेकर कई मिथक, डर और गलतफहमियो को दूर करने का प्रयास किया है l
थायराइड गर्दन के सामने स्थित तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है, जो T3 और T4 नामक हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, शरीर के तापमान, दिल की धड़कन, एनर्जी, पाचन, मासिक धर्म चक्र, शरीर की वृद्धि और मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। थायराइड हार्मोन के उत्पादन में किसी भी तरह का असंतुलन शरीर के कई अंगों और प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है। थायराइड रोगों में मुख्य रूप से हाइपोथायरायडिज्म, हाइपोथायरायडिज्म, घेंघा, थायराइड नोड्यूल और थायराइड कैंसर शामिल हैं। थायराइड की बीमारी जितनी आम है, उससे जुड़े मिथक और गलतफहमियां भी उतनी ही ज्यादा हैं।
*मिथक 1: थायराइड की समस्या केवल अधिक उम्र की महिलाओं को होती है*
तथ्य: थायराइड रोग किसी भी उम्र और किसी भी लिंग के व्यक्ति को हो सकते हैं। पुरुष, महिलाएं, बच्चे, किशोर और बुजुर्ग सभी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यहां तक कि कुछ नवजात बच्चों में जन्म से ही कॉन्जेनिटल हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है, जिसका समय पर इलाज जरूरी होता है।
*मिथक 2: थायराइड के लक्षण हमेशा साफ और आसानी से पहचान में आने वाले होते हैं*
तथ्य: कई बार थायराइड के लक्षण हल्के और अस्पष्ट होते हैं, जिन्हें लोग तनाव, बढ़ती उम्र, खराब नींद या लाइफस्टाइल की समस्या समझ लेते हैं। थकान, कमजोरी, कब्ज, मूड में बदलाव, बाल झड़ना, वजन बढ़ना या घटना, चिंता और अनियमित पीरियड्स जैसे लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं। इसी वजह से कई मरीज वर्षों तक बिना पहचान के रह जाते हैं।
*मिथक 3: हर थायराइड मरीज की गर्दन में सूजन दिखाई देती है*
तथ्य: सभी थायराइड मरीजों में घेंघा या गर्दन की सूजन नहीं होती। आजकल आयोडीन युक्त नमक के बढ़ते उपयोग और बेहतर पोषण के कारण कई थायराइड रोग बिना किसी बाहरी सूजन के भी पाए जाते हैं।
*मिथक 4: केवल डाइट बदलने या घरेलू नुस्खों से हाइपोथायरायडिज्म ठीक हो सकता है*
तथ्य: संतुलित आहार और स्वस्थ जीवन शैली जरूरी जरूर हैं, लेकिन हाइपोथायरायडिज्म के अधिकतर मरीजों को लेवोथायरोक्सिन नामक थायराइड हार्मोन दवा की आवश्यकता होती है। केवल डाइट से हार्मोन स्तर सामान्य नहीं होते।
*मिथक 5: पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली या सोया खाने से थायराइड रोग होता है*
तथ्य: ये सभी पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ हैं। सीमित मात्रा में सेवन करने पर ये सामान्य लोगों या थायराइड मरीजों के लिए नुकसानदायक नहीं होते। इन्हें पूरी तरह छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती।
*मिथक 6: TSH रिपोर्ट सामान्य आने के बाद थायराइड की दवा बंद की जा सकती है*
तथ्य: रिपोर्ट सामान्य इसलिए आती है क्योंकि दवा सही तरीके से काम कर रही होती है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा अचानक बंद करने से हार्मोन का संतुलन फिर बिगड़ सकता है और लक्षण वापस आ सकते हैं। कई मरीजों को जीवनभर दवा लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।
*मिथक 7: हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों के लिए वजन कम करना असंभव है*
तथ्य: सही दवा से थायराइड हार्मोन नियंत्रित होने के बाद मरीज स्वस्थ खान पान और नियमित शारीरिक गतिविधि के जरिए सफलतापूर्वक वजन कम कर सकते हैं।
मिथक 8: हाइपोथायरायडिज्म का इलाज शुरू होते ही तेजी से वजन कम हो जाता है
तथ्य: सही इलाज से मेटाबॉलिज्म और एनर्जी स्तर बेहतर होते हैं, लेकिन केवल दवा लेने से बहुत ज्यादा वजन कम होना जरूरी नहीं है। इसके लिए कैलोरी कंट्रोल और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।
मिथक 9: हाइपोथायरॉइडिज्म वाली महिलाएं गर्भधारण नहीं कर सकतीं
तथ्य: यदि थायराइड की समस्या का सही इलाज और नियमित निगरानी हो, तो अधिकांश महिलाएं स्वस्थ गर्भावस्था प्राप्त कर सकती हैं। हालांकि बिना इलाज के थायराइड रोग प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था दोनों को प्रभावित कर सकता है।
*मिथक 10: गर्भावस्था के दौरान थायराइड की दवा बंद कर देनी चाहिए*
तथ्य: गर्भावस्था में थायराइड का सही इलाज और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। मां और बच्चे दोनों के स्वस्थ विकास के लिए सही थायराइड हार्मोन स्तर जरूरी होता है। दवा बंद करने से गर्भपात, प्रीक्लेम्प्सिया, समय से पहले डिलीवरी और बच्चे की खराब वृद्धि का खतरा बढ़ सकता है।
*मिथक 11: हर थायराइड गांठ कैंसर होती है*
तथ्य: अधिकांश थायराइड नोड्यूल सामान्य और गैर कैंसरयुक्त होते हैं। केवल कुछ मामलों में ही ये कैंसर साबित होते हैं। हालांकि गर्दन में सूजन, निगलने में परेशानी, सांस लेने में दिक्कत या आवाज में बदलाव होने पर तुरंत जांच कराना जरूरी है।
*मिथक 12: हर थायरॉइड सूजन या घेंघा में सर्जरी जरूरी होती है*
तथ्य: हर मामले में ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होती। सर्जरी केवल तब की जाती है जब घेंघा सांस लेने या निगलने में परेशानी पैदा करे, सौंदर्य संबंधी समस्या हो, हाइपरथायरॉइडिज्म नियंत्रण में न आ रहा हो या कैंसर की आशंका हो।
थायराइड रोग आम ज़रूर हैं, लेकिन सही इलाज और जागरूकता से इन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इस वर्ल्ड थायराइड डे पर जरूरी है कि लोग मिथकों से बाहर निकलें, सही जानकारी अपनाएं और डर या गलत सूचनाओं के बजाय डॉक्टर की सलाह लें। बेहतर जागरूकता ही जल्दी पहचान, सही इलाज और स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
