मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान एवं सेवा सेतु अभियान में जनसेवा का संदेश
Spread the loveमुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान एवं सेवा...
Spread the loveमुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान एवं सेवा...
Spread the loveकरीब 60 लाख रुपए के सहायक...
Spread the loveगोवर्धनपुर पुल, मरीन ड्राइव और ऑक्सीजोन...
मदर्स डे स्पेशल: मां के प्यार को बनाया पहचान, आज देश के सबसे बड़े फिल्ममेकर में शुमार है संजय लीला भंसाली का नाम
संजय लीला भंसाली को ऐसे फिल्ममेकर के तौर पर देखा जाता है जिनका नाम राज कपूर, के. आसिफ और गुरु दत्त जैसे दिग्गजों के साथ लिया जाता है। अपनी फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय कहानियों को सबसे असली भारतीय अंदाज में पेश करने का एक अलग मानदंड बनाया है। वह भारतीय मनोरंजन जगत की एक बड़ी ताकत हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को दुनियाभर के मंच तक पहुंचाया है। आज भंसाली एक जीवित दिग्गज की तरह खड़े हैं, जिनका सिनेमा सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबरों तक सीमित नहीं है। लेकिन इस भव्यता, बड़े स्तर की कहानी कहने की कला और सिनेमाई शानदार दुनिया के पीछे एक बेटे के अपनी मां के लिए गहरे प्यार और सम्मान की भावुक कहानी छिपी है।
एक ऐसी इंडस्ट्री में जहां पहचान अक्सर विरासत और शोहरत से तय होती है, संजय लीला भंसाली ने अपनी मां का नाम “लीला” अपने नाम का स्थायी हिस्सा बनाकर उन्हें अपनी पहचान में हमेशा के लिए शामिल कर लिया। यह किसी दिखावे या प्रतीक के लिए नहीं, बल्कि उस महिला के लिए प्यार और शुक्रिया था, जिन्होंने हर संघर्ष में उनका साथ दिया। इस फैसले पर बात करते हुए भंसाली ने एक बार कहा था, “जब मैंने खुद को संजय लीला भंसाली बुलाने का फैसला किया, तब मैंने नहीं सोचा था कि मैं कोई ट्रेंड शुरू कर रहा हूं। लेकिन अगर लोग अपने नाम में अपने माता-पिता का सम्मान कर रहे हैं, तो मैं कहूंगा कि यह एक शुरुआत है। हमें अपने माता-पिता के लिए और बहुत कुछ करना चाहिए। दुख की बात है कि मेरे पिता मुझे जिंदगी में सफल होते नहीं देख पाए। लेकिन मेरी मां का आशीर्वाद हर कदम पर मेरे साथ रहा है। मुझे नहीं लगता कि उनके बिना मेरी कोई कीमत होती।”
संजय लीला भंसाली अक्सर अपनी मां को अपनी ताकत और हिम्मत का श्रेय देते रहे हैं। अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्होंने अपनी मां से “मुश्किल हालात में भी हार न मानने का जज्बा” पाया है, जो उनकी जिंदगी और उनकी फिल्मों दोनों में साफ नजर आता है। महिलाओं के लिए वही सम्मान और भावनाएं उनके सिनेमा में भी दिखती हैं, गंगूबाई काठियावाड़ी की मजबूत महिलाओं से लेकर पद्मावत और हीरामंडी: द डायमंड बाजार में दिखाई गई शालीनता और मजबूती तक। इस मदर्स डे पर भंसाली का सफर यह याद दिलाता है कि हर सफल इंसान के पीछे अक्सर एक मां होती है, जिनके त्याग, आशीर्वाद और अटूट भरोसे से उनकी तकदीर बनती है। आगे बढ़ते हुए, भंसाली की आने वाली फिल्म लव एंड वॉर उनके शानदार करियर का एक और बड़ा अध्याय बनने का वादा करती है।
