EPFO का बड़ा अपडेट! नौकरी बदलते ही अपने आप ट्रांसफर होगा PF का पैसा
Spread the loveनई दिल्ली :- नौकरी बदलने पर...
Spread the loveनई दिल्ली :- नौकरी बदलने पर...
Spread the loveजनता के पैसे पर डकैती डालने...
Spread the loveकेन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह...
नई दिल्ली,। पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारत की सभ्यता, स्वाभिमान और अदम्य आस्था का प्रतीक बताते हुए कहा है कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतीक है। पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर लिखे अपने विशेष लेख में पीएम मोदी ने कहा कि 11 मई को उन्हें एक बार फिर सोमनाथ जाने का अवसर मिल रहा है, जो उनके लिए सौभाग्य की बात है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा कि 2026 की शुरुआत में आयोजित “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” में शामिल होने का अवसर मिला था, जो मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। अब पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ भारत की उस अविनाशी चेतना का उत्सव है, जिसने हर विध्वंस के बाद नए संकल्प के साथ स्वयं को पुनर्स्थापित किया है। उन्होंने लिखा कि सोमनाथ के तट से टकराती समुद्री लहरें सदियों से यह संदेश देती रही हैं कि मानव चेतना और आस्था को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। अपने लेख में पीएम मोदी ने उन महान विभूतियों का भी स्मरण किया जिन्होंने विभिन्न कालखंडों में सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण में योगदान दिया। उन्होंने महाराज धारसेन चतुर्थ, राजा भोज, कर्णदेव सोलंकी, अहिल्याबाई होल्कर, गायकवाड़ शासकों तथा वीर हमीरजी गोहिल और वेगड़ाजी भील जैसे योद्धाओं के योगदान को याद किया। पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि 13 नवंबर 1947 को उन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का प्रण लिया था। बाद में केएम मुंशी और अन्य राष्ट्रनायकों के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हुआ। उन्होंने याद दिलाया कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण किया था। पीएम ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र पर चलते हुए देश के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा है। इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिली है। उन्होंने देशवासियों से सोमनाथ धाम की यात्रा करने का आह्वान करते हुए कहा कि वहां केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि भारत की अपराजित आत्मा और सांस्कृतिक निरंतरता का भी अनुभव होता है।
