सोनी इंडिया ने पेश किए 400mm और 600mm के नए G Master सुपर-टेलीफोटो लेंसदोनों लेंस
Spread the love अपने-अपने वर्ग में दुनिया के...
Spread the love अपने-अपने वर्ग में दुनिया के...
Spread the loveइंदौर, 2 अक्टूबर 2026। श्रीमंत महाराजा...
Spread the love फ्रेंडशिप एंथम चार्टबस्टर ‘तेरा यार...

रायपुर, 08 मई 2026

सुशासन को केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित न रखकर गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगी है। कोंडागांव जिले की ग्राम पंचायतों में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ ने ग्रामीण विकास को एक जन-अभियान का स्वरूप दे दिया है। पंचायतों में एक ओर जहां ‘चावल महोत्सव’ के जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर लोगों में भरोसा मजबूत किया गया, वहीं ‘रोजगार दिवस’ और ‘आवास दिवस’ के माध्यम से ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों और लंबित समस्याओं के समाधान पर विशेष फोकस किया गया।
जिलेभर की पंचायतों में गुरुवार को दिनभर चले इस अभियान में प्रशासनिक अमला गांवों तक पहुंचा और लोगों से सीधे संवाद कर योजनाओं की जानकारी दी। शासन की मंशा साफ रही कि ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ केवल कागजों में नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से जमीन पर मिले।
आवास दिवस के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित अन्य आवासीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अधूरे आवासों को समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की रणनीति पर भी काम हुआ।
गांवों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को आवास निर्माण से जोड़ने की पहल ने इस अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ दिया। प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण और आवास विकास साथ-साथ चलेंगे तो ग्रामीण जीवन अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनेगा।
रोजगार दिवस के दौरान मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए 15 जून तक प्रगतिरत कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया। ग्रामीणों की मांग के अनुसार नए कार्य प्रस्तावित करने पर भी चर्चा हुई। प्रशासन ने युवाओं को जल संरक्षण अभियान से जोड़ने पर जोर दिया। “मोर गांव – मोर पानी” अभियान के तहत तालाब, डबरी और जल संरचनाओं के निर्माण को जनभागीदारी से जोड़ने की रणनीति बनाई गई। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि आने वाले समय में जल संकट से निपटने में भी मदद मिलेगी।
ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए ‘आजीविका डबरी’ जैसे नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशासन का फोकस अब केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं, बल्कि गांवों में बहुआयामी आजीविका मॉडल विकसित करने पर है, जिससे परिवारों को स्थायी आर्थिक आधार मिल सके। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पंचायत स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी पहल हुई। पंचायतों के नागरिक सूचना पटल पर समूह की महिलाओं के नाम प्रमुखता से अंकित करने का निर्णय महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सुशासन तिहार की सबसे आधुनिक और उल्लेखनीय पहल डिजिटल पारदर्शिता को लेकर देखने को मिली। मनरेगा और पीएम आवास योजना से जुड़े कार्यों की जानकारी अब क्यूआर कोड के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। अमृत सरोवर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर ग्रामीण किसी भी योजना की प्रगति, लागत और कार्य विवरण की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
सुशासन तिहार के दौरान पंचायतों में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। लोगों ने आवास, रोजगार, राशन और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रशासन के सामने रखे। अधिकारियों ने कई समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया, जबकि लंबित मामलों के लिए समय-सीमा तय की गई। जिला प्रशासन का कहना है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं का प्रचार नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है।
