उज्जैन में मस्जिद के हिस्से को लेकर कार्रवाई, अफवाह फैलाने के आरोप में 15 लोग गिरफ्तार
Spread the loveबुलडोजर से मस्जिद को तोड़ रहा...
Spread the loveबुलडोजर से मस्जिद को तोड़ रहा...
Spread the loveकोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को...
Spread the loveसेवा की कहानी : सेवा संकल्प...
कुछ फिल्मकार शब्दों की ताकत को उतनी गहराई से समझते हैं जितनी संजय लीला भंसाली समझते हैं। अक्सर उनकी तुलना गुरुदत्त और राज कपूर जैसे दिग्गजों से की जाती है। भव्य कहानी कहने की शैली, बड़े-से-बड़े किरदार और भावनाओं से भरपूर कथानक के लिए मशहूर भंसाली की फिल्में सिर्फ दृश्य रूप से ही नहीं चमकतीं, बल्कि अपने डायलॉग्स के जरिए लंबे समय तक दिलो-दिमाग में बस जाती हैं। उनके लिखे संवाद काव्यात्मक, गहरे और चुभने वाले होते हैं, जो समय के साथ सांस्कृतिक पहचान बन जाते हैं। आइए नजर डालते हैं भंसाली की फिल्मों के 7 ऐसे डायलॉग्स पर जो आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं:
1. “कौन कम्बख्त बर्दाश्त करने को पीता है… हम तो पीते हैं कि यहाँ पर बैठ सकें, तुम्हें देख सकें।” – देवदास
देवदास मुखर्जी (शाहरुख खान) द्वारा कहा गया यह संवाद उस दर्द भरे, आत्म-विनाशकारी प्यार को बखूबी दर्शाता है जो फिल्म की आत्मा है। यह टूटे दिल की कविता जैसा है।
2. “इश्क… जो तूफानी दरिया से बगावत कर जाए वो इश्क, भरे दरबार में जो दुनिया से लड़ जाए वो इश्क।” – बाजीराव मस्तानी
मस्तानी (दीपिका पादुकोण) के प्रेम की गहराई और जुनून को बयां करता यह संवाद भव्य, बागी और बेहद प्रभावशाली है—बिल्कुल भंसाली की सोच की तरह।
3. “बाबूजी ने कहा गांव छोड़ दो… सबने कहा पारो को छोड़ दो… पारो ने कहा शराब छोड़ दो। आज तुमने कह दिया हवेली छोड़ दो… एक दिन आएगा जब वो कहेंगे, दुनिया ही छोड़ दो।” – देवदास
शाहरुख खान द्वारा बोला गया यह संवाद पॉप-कल्चर का हिस्सा बन चुका है। यह उतना ही ताकतवर है जितना भावुक।
4. “अगर आप हमसे हमारी जिंदगी मांग लेते… तो हम आपको खुशी-खुशी दे देते। पर आपने तो हमसे हमारा गुरूर छीन लिया।” – बाजीराव मस्तानी
काशीबाई (प्रियंका चोपड़ा) का यह संवाद दर्द के साथ आत्मसम्मान को भी दर्शाता है, जो इसे बेहद प्रभावशाली बनाता है।
5. “चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते… कभी भी मात दे सकती है।” – बाजीराव मस्तानी
यह संवाद बाजीराव प्रथम (रणवीर सिंह) के व्यक्तित्व की ताकत, खतरे और करिश्मे को एक साथ समेटता है।
6. “राजपूताना खून में इतना उबाल है कि अगर आंखों से गिरा तो आग लग जाएगी।” – पद्मावत
फिल्म के गहन माहौल में बोला गया यह संवाद गर्व, वीरता और अटूट आत्मा का प्रतीक है।
7. “कहते हैं कमाठीपुरा में कभी अमावस की रात नहीं होती… क्योंकि वहां गंगू रहती है।” – गंगूबाई काठियावाड़ी
यह संवाद लगभग पौराणिक भाव लिए हुए है, जो गंगूबाई को उनके अपने संसार में एक दंतकथा बना देता है।
दुखद प्रेम से लेकर अटूट स्वाभिमान तक, संजय लीला भंसाली ने ऐसे संवाद रचने की कला में महारत हासिल की है जो समय की सीमाओं को पार कर जाते हैं। ये संवाद सिर्फ बोले नहीं जाते—इन्हें महसूस किया जाता है, याद रखा जाता है और जश्न की तरह मनाया जाता है। यही साबित करता है कि भंसाली की दुनिया में शब्द भी उनके दृश्यों जितने ही भव्य होते हैं।
इस बीच, फिल्मकार इन दिनों अपनी अगली महत्वाकांक्षी फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की शूटिंग में व्यस्त हैं, जिसमें रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल नजर आएंगे।
