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मुख्यमंत्री श्री साय ने पूछा “आवास कोन भेजिस, मोहन ने कहा – मोदी जी ने”
रायपुर, 04 मई 2026

कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में आज एक अत्यंत भावनात्मक, आत्मीय और जनसरोकारों से जुड़ा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक सामान्य ग्रामीण के सादे निमंत्रण को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे अपने व्यवहार से एक यादगार क्षण में परिवर्तित कर दिया। गांव में उनके आगमन से जहां उत्साह और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ था, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने शासन और आमजन के बीच के आत्मीय संबंधों को भी जीवंत रूप में सामने रखा।

ग्राम लोखान निवासी मोहन मरावी के नए पक्के घर का आज गृह प्रवेश कार्यक्रम था। जैसे ही उन्हें यह जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री गांव के दौरे पर हैं, वे बिना देर किए सीधे उनके पास पहुंचे और अपने घर आने का न्योता दे दिया। यह एक ग्रामीण का असाधारण प्रेम भरा अनुरोध था, जिसे मुख्यमंत्री ने उसी सहजता और विनम्रता के साथ स्वीकार किया और उनके घर पहुंचकर इस अवसर को विशेष बना दिया।
मुख्यमंत्री के मोहन मरावी के घर पहुंचते ही वहां एक आत्मीय और पारिवारिक वातावरण बन गया। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के पूरे स्नेह और अपनत्व के साथ नारियल फोड़ा, दीप प्रज्वलित किया और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ गृह प्रवेश की रस्म संपन्न कराई। इस दौरान परिवार के सदस्यों के चेहरे पर जो संतोष, गर्व और खुशी झलक रही थी, वह इस बात का प्रतीक थी कि उनके सपनों का घर अब साकार हो चुका है। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने भी इस क्षण को उत्साहपूर्वक देखा और मुख्यमंत्री की सादगीपूर्ण शैली की सराहना की।
इस आत्मीय संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए मोहन से पूछा—“आवास कोन भेजिस?” इस पर मोहन ने सहजता के साथ उत्तर दिया—“मोदी जी ने।” यह छोटा-सा संवाद पूरे माहौल को भावनात्मक गहराई से भर गया और यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी का क्रियान्वयन सीधे लोगों के जीवन में किस प्रकार आशा और विश्वास का संचार कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने मोहन मरावी और उनके परिवार से विस्तार से बातचीत करते हुए उनके नए घर के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जाना। मोहन ने बताया कि उनका यह घर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त राशि और अपने परिश्रम से तैयार हुआ है। पहले उनका घर कच्चा था, लेकिन वर्ष 2024–25 में आवास स्वीकृत होने के बाद उनके भीतर पक्का घर बनाने का हौसला जागा। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्वयं ईंट बनाकर चार कमरों का सुदृढ़ और व्यवस्थित घर खड़ा किया, जो उनके श्रम, संकल्प और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने घर की गुणवत्ता, संरचना और उसमें झलक रही मेहनत की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि जब शासन की योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं और उसमें लोगों की अपनी मेहनत व सहभागिता जुड़ती है, तभी विकास का वास्तविक स्वरूप सामने आता है। उन्होंने इस पहल को आत्मनिर्भरता, जनभागीदारी और सकारात्मक बदलाव का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही राज्य के समग्र विकास की नींव को मजबूत करते हैं।
मोहन मरावी ने यह भी बताया कि उन्हें योजना के तहत राशि तीन किस्तों में प्राप्त हुई, जिसका उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और समझदारी से उपयोग किया। इसी के परिणामस्वरूप वे अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक पक्का घर तैयार कर सके।
मुख्यमंत्री ने पूरे परिवार को नए घर की हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और इस अवसर को गांव के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया, जो यह संदेश देता है कि संकल्प, श्रम और शासन की योजनाओं के समन्वय से हर सपना साकार हो सकता है।
