CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज, प्रदेश के कई जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी
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नई दिल्ली,। एलपीजी के बाद देश में सोने और चांदी की भी किल्लत हो सकती है। भारतीय बैंकों ने विदेशी सप्लायर्स से सोने और चांदी के आयात ऑर्डर रोक दिए हैं। कई टन सोना-चांदी कस्टम में अटका है, क्योंकि इनके आयात को अधिकृत करने वाला कोई औपचारिक सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्ट में यह बात ट्रेड सूत्रों ने कही है। बिना नए आयात के भारत को सप्लाई से जुड़ी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक कमजोर भारतीय डिमांड गोल्ड और सिल्वर के ग्लोबल प्राइसेज पर असर डाल सकती है। जबकि यह देश के व्यापार घाटे को कम सकता है और रुपये को सपोर्ट कर सकता है। रुपया, इस साल अब तक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियन करेंसीज में से एक है। रुपये पर दबाव घटाने के लिए अथॉरिटीज ने कई कदम उठाए हैं। हाल में रिफाइनरीज से अपने स्पॉट डॉलर परचेज को रोकने के लिए कहा है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के तहत आने वाला डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड आमतौर पर प्रत्येक वित्त वर्ष की शुरुआत में एक ऑर्डर जारी करता है, जिसमें सोने और चांदी का आयात करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से अधिकृत बैंकों की लिस्टिंग करता है। पिछला ऑर्डर अप्रैल 2025 में जारी किया था और यह 31 मार्च को खत्म हुए पिछले वित्त वर्ष तक वैध था। अब बैंक डीजीएफटी के नए दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड ने फिलहाल इस मामले को लेकर रॉयटर्स के सवाल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बैंकों को उम्मीद थी कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) अप्रैल की शुरुआत में ही ऑर्डर जारी कर देगा, जैसा कि यह हर साल करता है, लेकिन इसको लेकर अभी तक कोई अपडेट नहीं है। एक प्राइवेट बैंक में मुंबई बेस्ड एक बुलियन डीलर ने बताया कि बिना कस्टम क्लीयरेंस के 5 टन से ज्यादा गोल्ड अटका है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर डीलर ने बताया कि डीजीएफटी ऑर्डर के टाइमिंग की अनिश्चितता की वजह से बैंकों को विदेशी सप्लायर्स से नए इंपोर्ट ऑर्डर रोकने पड़े हैं। सूत्रों ने बताया कि बिना कस्टम क्लीयरेंस के करीब 8 टन इंपोर्टेड चांदी की अटकी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत की गोल्ड डिमांड साल 2025 में घटकर 710.9 मीट्रिक टन रही, जो कि 5 साल में सबसे कम है।
