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लोक कलाकारों को मिल रही नई पहचान, परंपराओं के संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा
रायपुर, 17 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित चिन्हारी योजना राज्य की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाकारों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। इस योजना के माध्यम से न केवल पारंपरिक कला रूपों का संरक्षण हो रहा है, बल्कि कलाकारों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से भी सशक्त किया जा रहा है।
चिन्हारी योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोक कलाकारों, शिल्पकारों, गायकों और नर्तकों की पहचान कर उनका पंजीयन किया जा रहा है। इससे एक व्यापक सांस्कृतिक डेटाबेस तैयार हो रहा है, जो भविष्य में कला के संरक्षण और संवर्धन में सहायक सिद्ध होगा।
योजना के अंतर्गत चयनित कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है तथा उन्हें राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत करने के अवसर भी दिए जाते हैं। इसके साथ ही मेलों, उत्सवों और शासकीय कार्यक्रमों में इन कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, जिससे उन्हें व्यापक पहचान मिल रही है।

नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देते हुए अनुभवी कलाकारों के मार्गदर्शन में युवाओं को पारंपरिक कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चिन्हारी योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू विलुप्त होती लोक परंपराओं का संरक्षण और पुनर्जीवन है। इसके तहत लोक नृत्य, लोकगीत और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित कर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान की जा रही है। साथ ही, डिजिटल माध्यमों के जरिए इन कलाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।
इस योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, स्थानीय कला को पर्यटन से जोड़कर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। चिन्हारी योजना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और कलाकारों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।
