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नई दिल्ली,। केंद्र सरकार ने गुरुवार को केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट में रीति-रिवाजों का विस्तारपूर्वक ज्रिक किया। एएसजी नटराज ने कहा, दक्षिण भारतीय मंदिरों में प्रसाद के रूप में मदिरा दी जाती है। कल को आप इस पर आपत्ति नहीं उठा सकते कि मदिरा न दी जाए। सुनवाई के दौरान एएसजी ने कहा कि एक उदाहरण देता हूं, कई मंदिरों में शाकाहारी भोजन परोसा जाता है, और अगर कोई व्यक्ति अपनी पसंद या अंतरात्मा की आवाज पर कहता है कि मांसाहारी भोजन करना चाहता है, तब वह किसी खास संप्रदाय के पास जाकर नहीं कह सकता कि मेरा यह अधिकार है और मुझे यही परोसा जाना चाहिए। उस शख्स को उन श्रद्धालुओं के अधिकारों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। उधर केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म आयु की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का पूरा समर्थन किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 2018 का फैसला इस धारणा पर आधारित है कि पुरुष श्रेष्ठ हैं और महिलाएं निम्न हैं। इसकारण से सभी महिलाओं को एंट्री देने का आदेश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। 2018 में, 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच 7 से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। कोर्ट में रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वाले 7 से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोध करने वाले 14 से 16 अप्रैल तक दलीलें दे सकते है।
