बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की तत्परता से 16 हजार से अधिक लोगों का बचाव
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नई दिल्ली। उत्तर भारत समेत देश के बड़े हिस्से में मौसम ने खतरनाक करवट ली है। गर्मी की आहट के बीच अचानक आए इस बदलाव ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर पटना, कोलकाता और मध्य प्रदेश तक बादलों के डेरे और बारिश ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज की है। मौसम विभाग ने अब देश के 17 राज्यों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें अगले 48 से 72 घंटों के दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं, गरज-चमक और ओलावृष्टि का अलर्ट शामिल है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस अचानक आए बदलाव की मुख्य वजह एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी का मिलन है। इस संयुक्त प्रभाव के कारण उत्तर भारत के साथ-साथ पश्चिमी और मध्य भारत में भी मौसम असामान्य बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर में दोपहर होते ही तेज धूप घने बादलों में छिप रही है, जिससे सड़क यातायात और विमान सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। सबसे गंभीर स्थिति उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में देखी जा रही है। यूपी के कई जिलों में भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है, जबकि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले झोंकों से भूस्खलन और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा है। झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, जो फसलों के लिए काल बन सकती है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में ओले गिरने से गेहूं और सरसों की तैयार खड़ी फसलों को भारी नुकसान होने का डर है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र और गुजरात में भी प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तापमान में 3 से 5 डिग्री की गिरावट आ सकती है। दक्षिण भारत के राज्यों केरल और तमिलनाडु में भी हल्की बारिश के आसार हैं। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। अगले पांच दिनों तक मौसम का यह अस्थिर दौर जारी रहने की संभावना है। फिलहाल, अचानक आई इस ठंडक ने गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन आंधी और ओलों के रूप में यह कुदरती मार आम जनता और विशेषकर कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
