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प्रदेश के जिलों में 29 गौधाम का होगा उद्घाटन
घुमंतू और निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए राज्य में 1460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य
रायपुर, 13 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में निराश्रित और घुमंतू गौवंश के संरक्षण तथा उनके समुचित व्यवस्थापन के लिए “गौधाम योजना” की शुरुआत की जा रही है। इस योजना का औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 14 मार्च को बिलासपुर जिले के गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय प्रेक्षागार में आयोजित कार्यक्रम से करेंगे। योजना के अंतर्गत राज्य के अन्य जिलों में भी 29 गौधामों का शुभारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे।
उल्लखेनीय है कि गौधाम योजना के तहत राज्य के प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अनुसार पूरे राज्य में कुल 1460 गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां गौवंश के लिए शेड, फेंसिंग, पेयजल, बिजली जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत वर्तमान में शासन द्वारा 36 गौधामों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 29 गौधामों का पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग में हो चुका है। इन गौधामों का औपचारिक शुभारंभ 14 मार्च 2026 को बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड के ग्राम लाखासार से मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।इस अवसर पर 10 अन्य जिलों में स्थित 28 गौधामों का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। गौधाम योजना का मुख्य उद्देश्य निराश्रित, घुमंतू और जप्त किए गए गौवंश पशुओं का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना है।
योजना के तहत उन शासकीय स्थलों का पंजीयन किया जाएगा जहां पहले से पशुधन संरक्षण के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध है। इन स्थलों का पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग के माध्यम से किया जाएगा।
गौधामों का संचालन पंजीकृत गौशाला समितियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों और सहकारी समितियों द्वारा किया जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा गौधामों के संचालन के लिए विभिन्न मदों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके तहत गौवंश के पोषण आहार के लिए पहले वर्ष 10 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु, दूसरे वर्ष 20 रुपये, तीसरे वर्ष 30 रुपये और चौथे वर्ष से 35 रुपये प्रतिदिन की सहायता दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त अधोसंरचना निर्माण एवं मरम्मत के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। साथ ही चरवाहों को 10,916 रुपये तथा गौसेवकों को 13,126 रुपये प्रति माह मानदेय प्रदान किया जाएगा।
गौधामों में चारा विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ 47 हजार रुपये प्रतिवर्ष की सहायता प्रदान की जाएगी। अधिकतम 5 एकड़ भूमि तक 2.35 लाख रुपये वार्षिक सहायता का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 गौवंश को रखने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। इस योजना से सड़कों और गांवों में घूमने वाले निराश्रित पशुओं की समस्या में कमी आएगी तथा गौवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
