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समर्पित शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य को दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट और नवाचारी योगदान के लिए राज्यपाल ने किया था सम्मानित
धमतरी, 06 मार्च 2026
प्रतिवर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समाज में महिलाओं की उपलब्धियों, उनके अधिकारों और सशक्तिकरण को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। इसी भावना को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ में दिव्यांग महिलाओं और बालिकाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है।
राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन, सिविल लाइन में पिछले माह जनवरी में आयोजित एक गरिमामय राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से दो महत्वपूर्ण ब्रेल पुस्तकों—‘दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी’ और ‘छत्तीसगढ़ के वीर’—का विमोचन किया गया। साथ ही दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स का भी लोकार्पण किया गया।
यह पहल विशेष रूप से उन दिव्यांग बालिकाओं और महिलाओं के लिए आशा की नई किरण बनकर सामने आई है, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में शैक्षणिक संसाधनों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ब्रेल पुस्तकें और ऑडियो बुक्स अब उन्हें शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं।
कार्यक्रम में धमतरी जिला की समर्पित शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य को दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट और नवाचारी योगदान के लिए राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों से ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के निर्माण का कार्य गति पकड़ सका, जिससे दृष्टिबाधित बच्चों विशेषकर बालिकाओं के लिए शिक्षा के नए द्वार खुले हैं।
लोकार्पित ऑडियो बुक्स में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के सभी विषयों के पाठ, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष सामग्री, सरगुजिया लोककथाएं, सामान्य ज्ञान, महिला सशक्तिकरण, तथा दिव्यांगजनों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं से जुड़ी जानकारी शामिल की गई है। यह सभी सामग्री “वर्ल्ड ऑडियो बुक” यूट्यूब चैनल पर एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गई है, जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को निःशुल्क और सरल शैक्षणिक संसाधन मिल सकें।
तब राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षकों के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य पुस्तकों को ब्रेल और ऑडियो स्वरूप में उपलब्ध कराना समावेशी शिक्षा की उत्कृष्ट मिसाल है। उन्होंने कहा कि इस पहल को अन्य राज्यों तक भी पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल बन सके।
इस अभियान की प्रेरणा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित दुर्ग की शिक्षिका के. शारदा को वर्ष 2024 में मिले सम्मान के बाद मिली। 25 अक्टूबर 2024 से शुरू हुए इस अभियान में उन्होंने स्वयं 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कीं। बाद में विभिन्न जिलों के शिक्षकों के सहयोग से यह संख्या बढ़कर 3100 से अधिक हो गई। पूर्व में के. शारदा और प्रीति शांडिल्य द्वारा संयुक्त रूप से तैयार ब्रेल पुस्तकों को छत्तीसगढ़ के 20 ब्रेल विद्यालयों में 100-100 प्रतियों के रूप में निःशुल्क वितरित किया जा चुका है।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य सहित सभी शिक्षक साथियों द्वारा दिव्यांगजनों के लिए किया जा रहा यह कार्य अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल शिक्षा को समावेशी बनाती है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, सेवा भावना और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करती है।
इस ऑडियो बुक निर्माण अभियान में 30 शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। राज्यपाल ने सभी योगदानकर्ता शिक्षकों को सम्मानित करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
महिला दिवस के अवसर पर यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब महिलाएं शिक्षा और सेवा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों के लिए कार्य करती हैं, तो परिवर्तन की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के माध्यम से दिव्यांग बालिकाओं और महिलाओं के लिए ज्ञान के द्वार खुल रहे हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की राह दिखा रहे हैं।
