गिल-रोहित का तूफान, वेस्टइंडीज पस्त; भारत ने 406 रन का लक्ष्य चेज कर रचा इतिहास
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जैसलमेर। भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में विशेष उड़ान भरकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह उड़ान भारतीय वायुसेना के प्रमुख युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति 2026’ के दौरान आयोजित की गई, जहां राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। राष्ट्रपति मुर्मु फ्लाइंग हेलमेट और विशेष फ्लाइट ड्रेस में ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में सवार हुईं। उनकी यह सॉर्टी दो ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों के फॉर्मेशन में संपन्न हुई। दूसरे हेलीकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह सवार थे। ‘प्रचंड’ एक अत्याधुनिक स्वदेशी हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसे कठिन युद्ध परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति की यह उड़ान देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में मजबूत कदम का प्रतीक है। ‘वायुशक्ति 2026’ में दिखी वायुसेना की ताकत भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित ‘वायुशक्ति 2026’ अभ्यास में विभिन्न लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और उन्नत हथियार प्रणालियों ने अपनी मारक क्षमता और सटीकता का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास देश की वायु शक्ति, सामरिक तैयारी और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन करने का प्रमुख मंच माना जाता है। राष्ट्रपति की उपस्थिति और ‘प्रचंड’ में उड़ान ने सशस्त्र बलों के मनोबल को और सुदृढ़ किया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे स्वदेशी रक्षा उत्पादन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश बताया। राष्ट्रपति मुर्मू पहले भी रच चुकी हैं इतिहास इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मु दिसंबर में भारतीय नौसेना की कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार हुई थीं। कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे से शुरू हुई उस यात्रा में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद थे। अक्टूबर में उन्होंने हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान दसॉल्ट राफेल में भी उड़ान भरी थी। वहीं 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरबेस पर उन्होंने सुखोई एसयू-30एमकेआई में सॉर्टी कर वायुसेना की क्षमता की सराहना की थी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल, सुखोई-30, आईएनएस वाघशीर और अब ‘प्रचंड’ में राष्ट्रपति की उड़ानें भारतीय सेनाओं की आधुनिकता, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में हो रही प्रगति का सशक्त प्रतीक हैं।
