मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान एवं सेवा सेतु अभियान में जनसेवा का संदेश
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महाशिवरात्रि पर्व पर शिवजी का पूजन-अर्चन, व्रत से अनिष्ट ग्रहों की शांति सहज ही सरल रूप में होती है, इस दिन विधि-विधान से किए गए दान पुण्य, शिवलिंग की पूजा, स्थापना का विशेष फल प्राप्त होता है। इस विशेष उपाय को करने से कालसर्प योग की शांति के साथ-साथ प्रतिकूल ग्रहदशा द्वारा उत्पन्न सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
शिवरात्रि पर शिवजी का पूजन-अर्चन, व्रत से अनिष्ट ग्रहों की शांति सहज ही सरल रूप में होती है। जन्मकुण्डली में अगर कालसर्पदोष विद्यमान हो, अथवा राहु-केतु की महादशा अथवा अन्तर्दशा पीड़ा दे रही हो, या फिर शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैय्या कष्टकारी हो तो महाशिवरात्रि के दिन शिवजी का पूजन, व्रत विशेष राहत दिलाता है। शिवजी की पूजा सौभाग्य में वृद्धि, विवाह, संतान प्राप्ति, धन प्राप्ति आदि अनेक प्रयोजन से की जाती है।
मनचाहा वर प्राप्त करने का उपाय
धन प्राप्ति के लिए शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ शिवरात्रि के दिन अवश्य करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से विवाह योग्य कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है। शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से उस घर-परिवार में कोई अकाल मृत्यु नहीं होती तथा घर के सभी सदस्य स्वस्थ रहते हैं। शिवरात्रि से बड़ा कोई परमतत्व नहीं है, शिवरात्रि व्रत एवं शिव पूजन के प्रभाव से असम्भव भी सम्भव हो जाते हैं, तथा मनुष्य पृथ्वी के समस्त सुखों को प्राप्त करता हुआ अन्त में मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।
शिवरात्रि के दिन शिव जी का अभिषेक जिसे रूद्राभिषेक कहा जाता है, कराना बेहद कारगर सिद्ध होता है। रूद्राभिषेक विभिन्न कामनाओं के लिए रामबाण उपाय है। जो भक्त अनिष्ट ग्रह दशाओं के कारण कष्ट में हों और उन्हें अपनी ग्रहदशा की जानकारी न हो, वे मात्र शिवजी पर नाग-नागिन का एक चांदी का जोड़ा शिवरात्रि के दिन चढ़ा दें तो भगवान शिव की कृपा से उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
महाशिवरात्रि पूजन विधान
शिवरात्रि में चार बार पूजन का चार प्रहर में विधान आता है और चार बार रुद्राभिषेक भी सम्पन्न करना चाहिए, प्रथम प्रहर में दुग्ध द्वारा शिव के ईशान स्वरूप को, द्वितीय प्रहर में दधि द्वारा अघोर स्वरूप को, तृतीय प्रहर में घृत द्वारा वामदेव रूप को तथा चतुर्थ प्रहर में मधु द्वारा सद्योजात स्वरूप को अभिषेक कर पूजन करना चाहिए। यदि साधक चार बार पूजन न भी कर सके तो प्रथम प्रहर में एक बार तो पूजन अवश्य ही करे। महाशिवरात्रि की रात्रि महा सिद्धिदायिनी होती है। इस समय में किए गए दान पुण्य, शिवलिंग की पूजा, स्थापना का विशेष फल प्राप्त होता है।
