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नई दिल्ली। देश में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) एक गंभीर समस्या बन गया है। कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन में एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से रेसिस्टेंट बैक्टीरिया भोजन के माध्यम से मानव शरीर तक पहुंच रहे हैं। इससे सामान्य संक्रमणों का इलाज मुश्किल हो रहा है। सरकार ने पशुधन में 37 एंटीमाइक्रोबियल दवाओं पर प्रतिबंध लगाया है। भारत में एएमआर की स्थिति चिंताजनक है, जिससे भविष्य में लाखों मौतें हो सकती हैं। अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। देश में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) अब केवल अस्पतालों और दवाओं की समस्या नहीं रह गई है। कृषि और पशुपालन, मुर्गीपालन व मत्स्य पालन में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और अनुचित उपयोग के कारण रेसिस्टेंट बैक्टीरिया कृषि उत्पादों और मांसाहार के जरिये भोजन की थाली तक पहुंच चुका है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया में बनने वाली हर तीन में से दो एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल इंसानों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि दूध, मांस, अंडा और मछली का उत्पादन बढ़ाने में हो रहा है।
