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29 करोड़ वर्ष प्राचीन समुद्री जीवाश्मों का किया अध्ययन, शोधार्थी हुए रोमांचित
एमसीबी/02 फरवरी 2026
मध्य प्रदेश स्थित डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. के.के. प्रजापति एवं डॉ. एस. सेल्वकुमार के नेतृत्व में एम.टेक द्वितीय वर्ष (चतुर्थ सेमेस्टर) के 27 छात्र-छात्राओं का दल मनेन्द्रगढ़ स्थित एशिया के सबसे बड़े गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क के भ्रमण एवं शोध अध्ययन हेतु पहुंचा। दल के सदस्यों ने पार्क में संरक्षित लगभग 29 करोड़ वर्ष प्राचीन समुद्री जीवाश्मों का अवलोकन किया। इतने प्राचीन जीवाश्मों को प्रत्यक्ष देखकर छात्र-छात्राएं अत्यंत उत्साहित एवं आश्चर्यचकित नजर आए। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक एवं क्षेत्रीय अध्ययन की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।
इस अवसर पर पुरातत्व/पर्यटन विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय एवं पुरातत्व संघ के सदस्य विद्याधर गर्ग ने फॉसिल्स पार्क में स्थल पर प्राप्त जीवाश्मों तथा इंटरप्रिटेशन बिल्डिंग में प्रदर्शित जीवाश्मों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र गोंडवाना काल के समुद्री जीवन का महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों द्वारा यहां पाए जाने वाले मोलस्का, यूरीडेस्मा एवं एकिलोपेक्टेन जैसे समुद्री जीवाश्मों के वैज्ञानिक एवं भूवैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही वन विभाग द्वारा पत्थरों पर उकेरी गई समुद्री जीवों की आकृतियों एवं शिल्पकला की भी जानकारी दी गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने विशेष रुचि दिखाई। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने जीवाश्मों के निर्माण, संरक्षण एवं उनके भू-वैज्ञानिक महत्व से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार पूर्वक समाधान किया। दल में मिनिरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के सीनियर जियोलॉजिस्ट बंटी कुमार, सीनियर टेक्नीशियन अंकित लोधी सहित सागर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं में अच्युत कुमार, एलीना, एलेन, अमन, अनुष्का, बिष्टि, धृती एवं अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे। भ्रमण के अंत में विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों एवं छात्र-छात्राओं ने फॉसिल्स पार्क प्रबंधन एवं पुरातत्व विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को वास्तविक क्षेत्रीय अध्ययन का अवसर मिलता है, जिससे उनकी शोध क्षमता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण सुदृढ़ होता है।
