धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 गांवों का होगा चयन
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भोपाल । मप्र में साल 2028 में विधानसभा चुनाव होना है। इसको लेकर अभी से सियासी हलचल जारी है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के बीच जमीन से लेकर वर्चुअल दुनिया तक सियासी वॉर छिड़ गया है। वहीं कांग्रेस मैदानी मोर्चे पर भी सरकार को घेरने में लगी हुई है। भाजपा-कांग्रेस में जिस तरह सियासी वार चल रहा है उससे तो यह तय है कि अगले 3 साल तक मप्र में चुनावी रार देखने को मिलेगी। सबसे बड़ी खासबात है कि मप्र में दोनों पार्टियों की चल रही चुनावी तैयारी और सियासी तकरार की दिल्ली से मॉनिटरिंग हो रही है। दरअसल, भाजपा लगातार सरकार में बने रहने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी हुई है। ऐसे में अभी से यहां के मुद्दों पर दिल्ली में बैठे राजनैतिक दलों के हाईकमानों की नजर है। कांग्रेस जहां दूषित पानी के मुद्दे को छोडऩा नहीं चाहती है, तो वहीं सत्ता पर बैठी भाजपा अपनी सरकार को उन मुद्दों को लेकर शेफ जोन में ले जाने की रणनीति पर लगातार काम कर रही है, जिसकी वजह से डैमेज होने की आशंका बनती है। कांग्रेस अलग-अलग मुद्दों को लेकर घेर रही सरकार गौरतलब है कि मप्र में कांग्रेस पिछले कुछ महीनों से लगातार सरकार और भाजपा पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर घेरती आ रही है। छिंदवाड़ा सिरप घटना में कांग्रेस ने जोर शोर से सरकार और भाजपा को बेनकाब करने की कोशिशें की, लेकिन प्रदेश सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे मामले को प्रदेश में हावी नहीं होने दिया। इसी तरह अब पार्टी इंदौर में दूषित पानी को लेकर हुई मौतों पर कांग्रेस के एक्शन पर नजर बनाए हुए हैं। भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि संगठन को मालूम है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लंबे समय तक जीवित रखना चाहती है। इसलिए शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे की हवा निकालने के लिए जल्द ही कोई बड़े निर्णय ले सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं कमान संभाल कर लोगों को विश्वास दिलाना शुरु कर दिया है कि सरकार उनकी प्रत्येक समस्याओं का निराकरण करने की दिशा में काम कर रही है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इंदौर के मामले को लेकर लगातार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फीडबैक ले रहा है और उन्हें आवश्यक दिशा में दिए जा रहे है। सीएम ने इस घटना के तत्काल बाद जिस तरह से अधिकारियों पर एक्शन लिया है, उससे काफी हद तक इंदौर सहित पूरे प्रदेश में सकारात्मक संदेश गया है। आने वाले समय में पार्टी और सरकार कुछ और कदम उठा सकती है, जिससे विपक्ष को इस मुद्दे पर पूरी तरह क्लीन बोल्ड किया जा सके। 17 को इंदौर में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन इधर कांग्रेस इंदौर दूषित पानी के मुद्दे को बड़े आंदोलन में तब्दील करने की कोशिश में लग गई है। कहा जा रहा है कि ऐसा निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के इंदौर आना इसी बात की ओर इशारा कर रहा है, क्योंकि छिंदवाड़ा जैसी घटना में राहुल गांधी या दूसरे राष्ट्रीय स्तर के नेता छिंदवाड़ा या भोपाल नहीं पहुंचे थे। लेकिन इंदौर घटना को बड़ा मुद्दा बनाने के लिए राहुल गांधी का इंदौर दौरा हो रहा है। पार्टी के जानकारों का कहना है कि दूषित पानी का मुद्दा जनता से सीधे जुड़ा हुआ है, विशेषकर इससे वह वर्ग प्रभावित हुआ है, जो निम्न आय वर्ग से आता है और पिछले कुछ चुनावों में यह वर्ग कांग्रेस से दूरी बनाकर अपना मतदान कर रहा है। ऐसे में कांग्रेस का मानना है कि इस मुद्दे को बड़ा बनाकर लंबे समय तक जीवित रखा जाएगा, जिसे इस वर्ग का मतदाता उनके साथ फिर से लौट आए। इसी लिए कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के प्रत्येक वार्ड में वॉटर ऑडिट कराने की मुहिम प्रारम्भ की है। पार्टी की यह मुहिम लंबे समय तक चलेगी, जिससे मुद्दा भी काफी समय तक प्रदेश में प्रभावशील रह सकता है। हालांकि कांग्रेस के कुछ नेता इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील बताते हुए दावा करते है कि इसमें कांग्रेस राजनैतिक लाभ लेने के लिए मैदान पर नहीं उतरी है, अलबत्ता जनता को न्याय दिलाने और उन्हें स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए सरकार और भाजपा से लड़ाई लड़ रही है। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि जनता से जुड़े मुद्दे को उनका दल हमेशा उठाता रहा है। वहीं कांग्रेस नेता ब्लॉक स्तर पर मनरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलेंगे।
