अहमदाबाद। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आए चांसलर मर्ज का अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गया। यह दो दिवसीय दौरा भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपनी यात्रा की शुरुआत में दोनों नेता साबरमती आश्रम पहुंचे, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात, चांसलर मर्ज और प्रधानमंत्री मोदी ने साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लिया। यह आयोजन न केवल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव को भी मजबूती प्रदान करता है। द्विपक्षीय वार्ता और मुख्य एजेंडा गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में दोनों नेताओं के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा रहा। इसके अलावा प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्किलिंग, हरित एवं सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने नवाचार और विज्ञान के क्षेत्र में एक-दूसरे का साथ देने का संकल्प दोहराया। आर्थिक और वैश्विक महत्व चांसलर मर्ज के साथ जर्मन की बड़ी कंपनियों के सीईओ का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यह दौरा 27 जनवरी को होने वाले भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जो इसे कूटनीतिक दृष्टि से और भी अहम बनाता है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और कुशल श्रमिकों की गतिशीलता पर विशेष जोर दिया गया है। जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन के अनुसार, भारत जर्मनी की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ है। पिछली बार दोनों नेताओं की मुलाकात कनाडा में जी 7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहाँ इस यात्रा की रूपरेखा तैयार की गई थी। यह दौरा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच आर्थिक और वैश्विक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगा।
