इंदौर | 12 अक्टूबर, 2025: भारत की कंज़म्प्शन स्टोरी को दो प्रमुख कारकों से नया बल मिला है – जीएसटी स्लैब्स को सरल बनाना और सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा। इन घटनाओं से ग्रामीण आय में वृद्धि, घरेलू बचत को सहारा और आवश्यक तथा विवेकाधीन दोनों तरह की वस्तुओं की मांग में मजबूती आने की उम्मीद है। इससे कंज़म्प्शन-थीम वाले म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ने की संभावना है।
टाटा एसेट मैनेजमेंट के वरिष्ठ फंड मैनेजर, सोनम उदासी ने कहा, “भारत की कंज़म्प्शन स्टोरी संरचनात्मक वृद्धि से जुड़ी है, जो बढ़ती आय, अनुकूल जनांकिकी और बेहतर जीवनशैली की आकांक्षा पर आधारित है। सरकार का जीएसटी को तर्कसंगत बनाने का कदम और अच्छा मानसून कंज़म्प्शन-आधारित क्षेत्रों के लिए बड़ा सहारा है। टाटा एएमसी में, हमारे पोर्टफोलियो व्यापक सूचकांकों की तुलना में चुनिंदा कंज़म्प्शन अवसरों में अधिक केंद्रित हैं, जिससे हम भारत के उभरते कंज़म्प्शन परिदृश्य के अनुरूप बने रहते हैं।”
टाटा इंडिया कंज़्यूमर फंड ने तीन साल में लगभग 19% रिटर्न दिया है, जबकि इसके बेंचमार्क निफ्टी इंडिया कंज़म्प्शन इंडेक्स (टीआरआई) का रिटर्न 17% रहा। दो साल में इस फंड ने लगभग 21% रिटर्न दिया है, जबकि बेंचमार्क का रिटर्न 20% रहा (स्रोत: वैल्यू रिसर्च)। निवेशकों की रुचि फंड की बढ़ती लोकप्रियता से साफ है—2025 (अगस्त तक) में कुल सकल निवेश 256.2 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो पिछले साल की समान अवधि के 219 करोड़ रुपये से 17% अधिक है। इंदौर से निवेश 18.3% बढ़कर 2 करोड़ रुपये हुआ (स्रोत: टाटा एमएफ)।
टाटा इंडिया कंज़्यूमर फंड शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल है—इसने तीन साल में लगभग 20% रिटर्न दिया है, जो अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ है, और दो साल में 21% रिटर्न दिया है, जो दूसरे स्थान पर है (स्रोत: वैल्यू रिसर्च)।
कंज़म्प्शन फंड्स ने 2024 में 20.96% का डबल-डिजिट रिटर्न दिया, जो बीएसई 500 टीआरआई बेंचमार्क (15.67%) से बेहतर रहा (स्रोत: वैल्यू रिसर्च)। 2025 में थोड़ी गिरावट के बाद, मार्च से यह श्रेणी फिर से उभरी है, जो व्यापक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार के चलते संभव हुआ। आयकर में राहत, आवश्यक या प्रोसेस्ड वस्तुओं पर कम जीएसटी दरें और ग्रामीण सुधार के साथ, कंज़म्प्शन लंबी अवधि में वृद्धि का अहम इंजन बना रहेगा।
टाटा इंडिया कंज़्यूमर फंड दूरदर्शी रणनीति अपनाता है, जिसमें उपभोक्ता सेवाओं, विवेकाधीन रिटेल, टिकाऊ वस्तुओं और पीएलआई-लिंक्ड व्यवसायों जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। यह फंड अत्यधिक ऋणग्रस्त या कम मार्जिन वाले पारंपरिक क्षेत्रों से बचता है और साथ ही वाहनों, पूंजीगत वस्तुओं, निर्माण सामग्री, क्यूएसआर और ई-कॉमर्स जैसे उपभोक्ता-केन्द्रित क्षेत्रों में विविध निवेश बनाए रखता है।
संरचनात्मक कारकों की स्थिरता और चक्रीय कारकों के अनुकूल रुख के साथ, यह फंड निवेशकों को भारत की अगली कंज़म्प्शन-आधारित वृद्धि यात्रा में भागीदारी का अवसर प्रदान करता है।
