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वकील बोले- कोर्ट ने हमारा तर्क माना, सभी के ऊपर से हटेगा यूएपीए नई दिल्ली । पीला धुआं निकालने वाले कैनिस्टर बाजार में खुलेआम बिक रहे हैं। ये होली, शादी और कई सेलिब्रेशन में इस्तेमाल होते हैं। फिर इसका इस्तेमाल करने वालों पर राजद्रोह का मामला कैसे लग सकता है। 13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। कोर्ट के ऑर्डर की दो लाइनें इस मामले के दो आरोपी की जमानत का आधार बनीं। दोनों आरोपी करीब 18 महीने बाद 8 जुलाई, 2025 को जेल से बाहर आए। दोनों की जमानत पर कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखी हैं। नीलम आजाद के वकील बलराज मलिक और महेश कुमावत के वकील सोमार्जुन भी इस मामले में राजद्रोह लगने का कोई आधार नहीं मानते। वकील बलराज कहते हैं, कोर्ट ने हमारा तर्क माना। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणी से हमें उम्मीद है कि बाकी जेल में बंद चार आरोपियों को भी जल्द जमानत मिलेगी। सभी के ऊपर से यूएपीए भी हटाया जाएगा। वकील सोमार्जुन इस घटना के मास्टरमाइंड कहे जा रहे मनोरंजन डी के भी वकील हैं। वे कहते हैं कि मनोरंजन कोई मास्टरमाइंड नहीं, बल्कि सामान्य युवक है। ये सभी किसी साजिश की नीयत से नहीं बल्कि अपने मुद्दे उठाने के लिए प्रोटेस्ट करना चाहते थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नीलम के भाई रमेश ने बताया कि हमें पता चला था कि नीलम तिहाड़ के गेट नंबर चार से बाहर आएगी, लेकिन वह 6 नंबर गेट से निकली। उसे जैसे ही देखा हम सब रो पड़े। नीलम भी रो रही थी। उन्होंने कहा कि हमें पहले ही कह दिया गया था कि रिहाई के वक्त न तो नीलम की फोटो लें न वीडियो बनाएं। उसके बारे में किसी से बात करने पर भी रोक लगाई गई है। कोर्ट के आदेश के कारण नीलम घर नहीं जा सकती है। इसलिए दिल्ली में ही किराए के फ्लैट में रहेंगी। उनके साथ उनकी मां और बड़ा भाई भी दिल्ली में ही रहेगा। भाई ने बताया कि दिल्ली में रहना हमारे लिए बहुत महंगा है। पुलिस स्टेशन में हफ्ते में 3 बार हाजिरी का मतलब आने-जाने का किराया भी देना होगा। अभी तो जरूरी था कि नीलम बाहर आए। अब हम अपने वकील से बात करके इस पर भी एक पिटीशन डालेंगे कि नीलम को जल्द से जल्द घर जाने की इजाजत दी जाए।
