रायगढ़, 8 जून । इप्टा का ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य प्रशिक्षण शिविर का समापन आज रविवार शाम को पॉलीटेक्निक सभागार में दो नटको के मंचन के साथ समापन होगा l पॉलिटेक्निक सभागार में दो नाटकों का मंचन किया जाएगा।
इप्टा में बच्चों के लिए रंगकर्म की परम्परा संभवतः आगरा इप्टा से हुई थी। इप्टा के रंगकर्मियों, शहर के साहित्यकारों और उनके परिचितों के बच्चों को लेकर ‘लिटिल इप्टा’ की सांस्कृतिक गतिविधियाँ बीसवीं सदी के छठवें-सातवें दशक से राजेन्द्र रघुवंशी के नेतृत्व में शुरु हुई थीं। ज्योत्स्ना रघुवंशी तथा अचला सचदेव ने अपने संस्मरणों में इस बात का उल्लेख किया है। मध्य प्रदेश में जबलपुर, होशंगाबाद आदि इकाइयों में अस्सी के दशक में बच्चों की नाट्य-कार्यशालाओं की शुरुआत हुई। पिछले कई वर्षों में रायगढ़ के अलावा भिलाई, अंबिकापुर (छत्तीसगढ़), अशोक नगर, गुना (मध्यप्रदेश), लखनऊ, उरई, आगरा (उत्तर प्रदेश) के अलावा केरल में लगातार बच्चों के साथ इप्टा की इकाइयाँ काम कर रही हैं। इस वर्ष भिलाई, अशोक नगर, गुना और रायगढ़ में कार्यशालाओं के आयोजन किया जा रहा है।
इप्टा रायगढ़ गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के व्यक्तित्व विकास एवं उनकी रंगमंचीय प्रतिभा को निखारने के लिए ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करता रहा है। इस वर्ष भी दो स्थानों पर बच्चों को नाट्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रज्ञा विद्या मंदिर मालीडीपा एवं स्वामी विवेकानंद स्कूल रेलवे बंगला पारा में भारतीय जन नाट्य संघ के प्रशिक्षित निर्देशकों के निर्देशन में 25 मई से सुबह सात बजे से शिविर का आयोजन किया जा रहा है। ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य प्रशिक्षण शिविर में थियेटर गेम्स, एक्सरसाइजेस के अलावा अभिनय, संगीत, नृत्य, माइम एवं मूवमेंट्स का प्रशिक्षण दिया गया है। शिविर में तैयार हुए तीन नाटक, 2 समूह नृत्य और जनगीत तैयार किए गए हैं, जिसका मंचन रविवार को कमला नेहरू पार्क के सामने स्थित पॉलीटेक्निक सभागार में किया जाएगा।
