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आज के समय में बदलते लाइफ स्टाइल और अनहेल्दी डाइट कई बीमारियों की जड़ मानी जाती है। लोग काम के चक्कर में न समय से खा पाते हैं, ना हीं चैन से सो पाते हैं। साथ ही दिन का ज्यादातर समय स्क्रीन पर ही बिताते हैं, जैसे- मोबाइल, लैपटॉप या टेलीविजन। इन्हीं में एक है माइग्रेन की बीमारी, जिसे अधकपारी के नाम से भी जानते हैं। योगाचार्य महेश पाल बताते है कि माइग्रेन एक बहुत ही आम न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, माइग्रेन एक तरह का सिरदर्द होता है, जो आमतौर पर सिर के आधे हिस्से में होता है। यह मस्तिष्क में तंत्रिका तंत्र के विकारों के कारण होता है। इस बीमारी में अक्सर सिर में हल्का और तेज कष्टदाई दर्द होता है।लेकिन यह आम सिरदर्द से काफी अलग होता है। यह दर्द किसी भी समय हो सकता है, जिसे बर्दाश्त कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। माइग्रेन” ग्रीक शब्द “हेमिक्रेनिया” से लिया गया है, जिसे गैलेन ने 2000 ई. में दिया था। इस रोग से पूरे वैश्विक स्तर पर 14.4% और भारत में 17-18% लोग ग्रस्त है।और यह संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है माइग्रेन होने से पहले हमें कई लक्षण हमारे सामने नजर आते हैं जिसमें आंखो के आगे काला धब्बा दिखना, त्वचा में चुभन महसूस होना,कमजोरी लगना,आंखो के नीचे काले घेरे,ज्यादा गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन होना,सिर के एक ही हिस्से में दर्द होना,प्रकाश और ध्वनी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना आदि माइग्रेन रोग कई प्रकार के होता है, क्रोनिक माइग्रेन में हर महिने 15 दिन से ज्यादा समय तक दर्द शामिल होता है।पीरियड्स माइग्रेन यह माइग्रेन पीरियड्स के दौरान महसूस होता हैं। एब्डोमिनल माइग्रेन 14 साल के कम उम्र के बच्चों को होता है,जो आंत और पेट के अनियमित कार्य की वजह से हो सकता है।वेल्टिबुलर माइग्रेन में गंभीर चक्कर आते हैं।हेमिप्लेजिक माइग्रेन में शरीर के एक तरफ अस्थाई रूप से कमजोरी हो जाती है। माइग्रेन की समस्या से ग्रस्त होने के पीछे कई कारण सामने नजर आए है जिसमें शरीर हाइड्रेट नहीं रहना, ज्यादा चिंता करना, आवश्यकता से ज्यादा तनाव लेना, महिलाओं में हार्मोनल बदलाव तेज प्रकाश, तेज ध्वनी,नींद में बदलाव करना,सिगरेट और शराब पीना, अवस्थित दैनिक दिनचर्या व आहारचर्या माइग्रेन की समस्या से बचाव में योग प्राणायाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और तंत्रिका तंत्र के विकारों को ठीक करने में मदद करता है मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ाता है जिससे हम माइग्रेन की समस्या से बचाव करने मैं सक्षम बनते हैं, अनुलोम विलोम प्राणायाम शरीर में सांसों की क्रियाओं पर नियंत्रण करता है।अनुलोम विलोम प्राणायाम से शरीर के सभी अंगों में शुद्ध ऑक्सीजन का संचार होता है, खासतौर पर गर्दन और मस्तिष्क में। इससे माइग्रेन के अटैक या सिरदर्द की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। अनुलोम विलोम प्राणायाम के अभ्यास के लिए सर्वप्रथम सुखासन या पद्मासन में बैठ जाए बांयी नासिका से सांस ले दांयी नासिका से सांस छोड़ दें फिर दांयी नासिका से सांस ले और बांयी नासिका से सांस छोड़ दें इस प्रकार 5 से 10 मिनट तक यह अभ्यास दोहराते रहे,अगर हम माइग्रेन रोग का समय पर रोकथाम नहीं कर पाते हैं तो हमें कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिसमें माइग्रेन शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है, जिसके कारण हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह मानसिक तनाव का कारण भी बनता है, जिसके कारण व्यक्ति को डिप्रेशन चला जाता है। यदि ओकुलर माइग्रेन हो तो यह आपकी आखों को नुकसान पहुंचा सकता है, और आंखों में खून का बहाव कम हो सकता है।माइग्रेन में एंग्जायटी के कारण अनिद्रा की भी समस्या हो सकती है। इसलिए माइग्रेन वह अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए योग प्राणायाम प्रभावी चिकित्सा उपाय है इसको हमें हमारी दिनचर्या में अवश्य शामिल करना चाहिए जिससे हम विभिन्न प्रकार के रोगों से बचे रहे और स्वयं व अपने परिवार को योग ऊर्जा से ऊर्जावान बनाए रखें
