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बिलासपुर, 13 जनवरी । छत्तीसगढ़ प्रदेश में नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे सहित सड़कों को मवेशी मुक्त करने सटीक रोड मैप बनाने को लेकर चल रही जनहित याचिका पर सोमवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। जिसमें कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश के परिपालन की जानकारी मांगी। जिसपर शासन ने अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर के माध्यम से अपना पक्ष रखा। जिसमें कहा गया कि छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशी से सड़कों को मुक्त करने और सटीक कार्य योजना को लेकर बनाई जाने वाली एसओपी का ड्राफ्ट फाइनल नहीं हुआ है। जिसके लिए शासन ने 15 दिन का समय मांगा। जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 10 फरवरी 2025 तय की है।
दरअसल पिछली सुनवाई में राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों पर आवारा पशुओं की समस्या को रोकने के लिए देश के अन्य सात राज्यों द्वारा अपनाए गए तंत्र की जांच करने के लिए गठित समिति और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत पर भी जवाब नहीं आया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शासन और अन्य विभागों को समय दिया था। 23 अक्टूबर 2024 के आदेश के परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्य सचिव को राज्य के राजमार्गों और जिलों की सड़कों पर मवेशियों के आतंक की निगरानी और रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में नया हलफनामा दायर करने का आदेश दिया था। जिसमें राज्य के संभागीय आयुक्तों से संभागवार सर्वेक्षण रिपोर्ट मांगी गई थी। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा के संभागीय आयुक्तों ने विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
कोर्ट के आदेश पर सभी जिले के प्रशासन ने उन ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में आवारा पशुओं की समस्या के बारे में जागरूकता लाने के लिए सरकारी एजेंसियों ने पशु मालिकों के साथ बैठकें की थीं। आयोजित की गई बैठकों की संख्या को भी सर्वेक्षण रिपोर्ट में शामिल किया गया है। पहले के प्रस्ताव के अनुसार आवारा पशुओं के विश्राम के लिए सड़क के किनारे साफ-सफाई और समतलीकरण के लिए स्थान चिह्नित किए गए थे। ऐसे चिह्नित स्थानों की संख्या को सर्वेक्षण रिपोर्ट में शामिल किया गया है। पहले के प्रस्ताव के अनुसार सड़क से आवारा पशुओं को हटाने की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई थी। लेकिन इन तमाम कोशिश के बावजूद मवेशियों की सड़क में मौत और उनके कारण हो रही दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ने से परेशानी खड़ी है। वहीं सुनवाई के दौरान इसको लेकर के एक एसओपी जारी करने का ड्राफ्ट बनाने की जानकारी दी गई थी, जिस पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है।
