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नई दिल्ली, 06 नवंबर । उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को गुजरात के सोमनाथ मंदिर के आसपास गैर-शाकाहारी भोजन की बिक्री, तैयारी और भंडारण पर लगे प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि धार्मिक आस्था और कारोबार के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। हालांकि, न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय से इस विवाद पर जल्द अंतिम निर्णय देने को कहा है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेस्टोरेंट संचालकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए गुजरात उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसके तहत सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज पर प्रतिबंध बहाल किया गया था। रेस्टोरेंट संचालकों की ओर से वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि देश की बड़ी आबादी मांसाहारी भोजन करती है और इस तरह के प्रतिबंध से उनके कारोबार तथा रोजगार पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने भोजन की पसंद को व्यक्तिगत अधिकार बताते हुए प्रतिबंध पर सवाल उठाए।
इस पर कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संतुलन बनाए रखना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह इस मुद्दे पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं करना चाहती। उच्चतम न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय से मामले की सुनवाई शीघ्र पूरी करने का अनुरोध किया और दो महीने के भीतर अपील का निपटारा करने को कहा।
गिर सोमनाथ जिले के प्रशासन ने 10 अगस्त को अधिसूचना जारी कर सोमनाथ मंदिर के आसपास 500 मीटर के दायरे तथा निर्धारित तीर्थ मार्गों पर मांसाहारी भोजन की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध लगाया था। रेस्टोरेंट संचालकों ने इस अधिसूचना को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 30 अक्टूबर को प्रतिबंध को निरस्त कर दिया था।
राज्य सरकार की तत्काल अपील पर उसी दिन उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी और प्रतिबंध फिर लागू हो गया। अब उच्चतम न्यायालय ने भी प्रतिबंध हटाने से इनकार करते हुए मामले का अंतिम निर्णय गुजरात उच्च न्यायालय पर छोड़ दिया है। उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 25 नवंबर को निर्धारित है।
