समाज को बांटती है जाति की जड़ता, एक सूत्र में पिरोती है साझी आस्था और संस्कृति : मुख्यमंत्री योगी
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भागलपुर, 03 नवंबर । लोक आस्था के महापर्व छठ के मद्देनजर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जिले के विभिन्न गंगा घाटों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम ने छठ व्रतियों की सुगमता के लिए घाटों के समतलीकरण, साफ-सफाई और बैरीकेडिंग की व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि गंगा के जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए सभी खतरनाक घाटों को समय रहते चिह्नित कर वहां लाल कपड़ा या साइनबोर्ड लगाया जाए। इसके साथ ही गहराई वाले स्थानों पर पुख्ता बैरीकेडिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या डूबने के जोखिम को रोका जा सके। पर्व के दौरान घाटों तक आने-जाने वाले रास्तों को लेकर डीएम ने पूर्व में ही जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे। निरीक्षण में उन्होंने पहुंच मार्गों को मोटरेबल और सुगम बनाने के कार्यों की प्रगति देखी। उन्होंने नगर निगम और संबंधित अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुख्य सड़कों से लेकर गंगा घाट तक जाने वाली गलियों और रास्तों में कहीं भी गंदगी या गड्ढे नहीं होने चाहिए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी प्रमुख और संवेदनशील घाटों पर एसडीआरएफ की टीमें, स्थानीय गोताखोर और लाइफ जैकेट से लैस नावें तैनात रहेंगी। रात और अल सुबह अर्घ्य के समय पर्याप्त रोशनी के लिए घाटों पर हाईमास्ट लाइट और अतिरिक्त बिजली व प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है। महिला व्रतियों की सुविधा के लिए घाटों पर पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम (कपड़े बदलने के अस्थाई कक्ष) और चलंत शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जन को सभी घाटों पर मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस की मुस्तैद तैनाती का निर्देश दिया गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेताया कि छठ महापर्व में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को आपस में समन्वय स्थापित कर बचे हुए कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करने की हिदायत दी गई है ताकि छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं को अर्घ्य देने में कोई असुविधा न हो।
