कांग्रेस का भीड़तंत्र से अराजकता पैदा कर लोकतंत्र खत्म करने प्रयास कभी सफल नहीं होगा : उप मुख्यमंत्री अरुण साव
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नई दिल्ली, 01 नवंबर । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता आरपी सिंह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के बाहर हुई हिंसा को लेकर कांग्रेस नेता कमलनाथ की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 1 नवंबर 1984 को जब दिल्ली में सिखों के खिलाफ हिंसा हो रही थी और गुरुद्वारे के बाहर दो सिखों को जिंदा जलाया जा रहा था, उस समय कमलनाथ हजारों लोगों की भीड़ के बीच घटनास्थल पर मौजूद थे।
आरपी सिंह ने एक्स मीडिया पर साझा किए अपने बयान में आरोप लगाया कि कमलनाथ का भीड़ पर प्रभाव था। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद चार दशक बीत जाने पर भी जवाबदेही क्यों तय नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व वाले कांग्रेस के कार्यकाल में भी कमलनाथ को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं। वह केंद्र में मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तक बने।
आरपी सिंह ने राहुल गांधी से कहा कि सिख समुदाय को राजनीतिक संरक्षण या चुप्पी नहीं बल्कि 1984 की घटनाओं का सच, न्याय और जवाबदेही चाहिए।
