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– मध्य प्रदेश विधानसभा अगले सत्र से होगी पेपरलेस, विधायकों का प्रशिक्षण शुरू
भोपाल, 28 अक्टूबर। पहले जब विधायकों को प्रश्न लिखकर जमा करने होते थे, तब विधानसभा के एक सत्र में औसत 700 प्रश्न आते थे। ऑनलाइन व्यवस्था होने के बाद एक सत्र में प्रश्नों की संख्या चार हजार तक पहुंच गई। ये प्रश्न हर सदस्य के क्षेत्र की आवाज हैं। जब इतनी समस्याएं सरकार तक पहुंचती है तो इनका निराकरण करने के लिए व्यवस्थाएं अधिक सक्षम बनाती जाती है। ई विधानसभा होने के बाद विधानसभा के कार्य में कुशलता और पारदर्शिता आएगी और जनसमस्याओं को व्यापक रूप से समाधान हो सकेगा।
यह विचार मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन नेवा के अंतर्गत विधायकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घघाटन करते हुए व्यक्त किए। मध्य प्रदेश विधानसभा अगले सत्र से पेपेरलेस होने जा रही है। इसके लिए विधानसभा में आयोजित तीन दिनी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत, प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अजय विश्नोई, विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा, प्रशिक्षण के लिए आए अमित जैन तथा विधायकगण व उनका स्टॉफ उपस्थित थे।
विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि लंबे समय से हम सब लोग डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पर काम कर रहे थे, प्रसन्नता है कि अब यह कार्य अंतिम चरण में है। हम सभी जानते हैं कि अगर हमें आगे बढ़ाना है तो युग के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। जब भी कोई नई तकनीक आती है तो एक पक्ष उस नई विधा का विरोध करता है और एक पक्ष उसे नई विधा को अस्त्र बनाकर प्रतिस्पर्धा में अन्य लोगों के साथ विजय प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूरदृष्टि वाले नेता हैं। अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के शुरुआती दौर में जब उन्होंने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया का लक्ष्य रखा तो इन्हें नारा माना गया। वैसे नारे जैसे सामान्य तौर पर राजनीतिक क्षेत्र में लगाए जाते हैं। लेकिन आज देश डिजिटल क्रांति के जिस स्थान पर खड़ा हुआ है उसकी तारीफ पूरी दुनिया कर रही है। तकनीक का उपयोग करके समय भी बचाया जा सकता है और गुणवत्ता भी प्रदर्शित की जा सकती है। तकनीक का उपयोग कर हम पूरी पारदर्शिता के साथ अपने जीवन को खुला रख सकते हैं तथा जिन मतदाताओं ने हमको निर्वाचित करके इस सदन में पहुंचाया, उनके सामने अपने कार्यों को रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया का ही परिणाम है कि चाहे किसान सम्मान निधि हो या लाडली बहन योजना, एक बटन दबाकर पैसा सीधा हितग्राही के खाते में पहुंचा दिया जाता है। बीच में कोई भी बिचौलिया नहीं होता है। जबकि पहले की सरकारों में यही असंतोष रहता था कि पात्र व्यक्तियों को पैसा नहीं मिला। तकनीक समय भी बचाता है और पारदर्शिता भी लाती है।
विधानसभा के पेपरलेस होने की प्रक्रिया के संबंध में तोमर ने एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब डिजिटल भारत की बात चल रही थी तब प्रधानमंत्री मोदी को लगता था कि लोकसभा, राज्यसभा व देश की सभी विधान सभाएं एक स्थान पर उपलब्ध होनी चाहिए। इसी मंशा के अनुरूप नेवा योजना बनाई गई। संसदीय कार्य मंत्री होने के कारण मैंने इसके क्रियान्वयन का जिम्मा संभाला और इसे लांच किया। मध्य प्रदेश में हाउस कमेटी में इस पर विचार-विमर्श किया। मुझे प्रसन्नता है कि सभी सदस्यों की सहभागिता के परिणाम स्वरूप आज यह परियोजना मूर्तरूप ले रही है। अब मध्यप्रदेश विधान सभा भी राष्ट्रीय ई विधान एप्लीकेशन में दिखाई देगी।
लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत ने नेवा के उपयोग पर प्रकाश डाला तथा इसे बेहतर तथा व्यापक बनाने के लिए सुझाव दिए। प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अजय विश्नोई ने नेवा की विषयवस्तु तथा महत्व को विस्तार से बताया। विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने स्वागत भाषण दिया।
पहले सत्र इन विधायकों का प्रशिक्षण
सरला विजेन्द्र रावत, अम्बरीष शर्मा, केशव देसाई, डॉ. सतीश सिकरवार, मोहन सिंह राठौड़, फूल सिंह बरैया, रमेश प्रसाद खटिक, कैलाश कुशवाहा, प्रीतम लोधी, महेन्द्र रामसिंह यादव , ऋषि अग्रवाल, पन्नालाल शाक्य, प्रियंका पेंची,जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, ब्रजेन्द्र सिंह यादव, निर्मला सप्रे, इंजीनियर प्रदीप लारिया, वीरेन्द्र सिंह लोधी, नितेन्द्र ब्रिजेन्द्र सिंह राठौड़, अनिल जैन, जयन्त मलैया, हरदीप सिंह डंग, इंजीनियर नरेन्द्र प्रजापति, रामनिवास शाह, मनीषा सिंह, शिवनारायण ज्ञानसिंह, संदीप प्रसाद जायसवाल, अभिलाष पाण्डेय, अशोक ईश्वरदास रोहाणी, संजय उईके, विश्वनाथ सिंह “मुलायम भैया”, कंचन मुकेश तन्वे, भंवरसिंह शेखावत, श्याम बरडे।
